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लड़कियों की आवाज को बुलंद करना ही होगा

Girls' voices must be raised
ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। देश का विकास आधी आबादी को आगे बढ़ाए बिना नहीं हो सकता। इसके लिए लड़कियों की आवाज को बुलंद करना होगा। देश के बेहतर भविष्य के लिए पुरानी कुरीतियों और विचारों को बदलकर लड़कियों को समान अवसर देने होंगे। इसी विषय पर इंडिया हैबिटेट सेंटर में कनाडा के उच्चायोग ने ‘गर्ल अप इंडिया’ के सहयोग से सम्मेलन का आयोजन किया।
अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित हुए इस सम्मेलन का विषय ‘एम्पावर हर भविष्य के लिए लड़कियों का दृष्टिकोण’ था। दिनभर चले इस सम्मेलन में विशेषज्ञ, नागरिक समाज के नेता, युवा अधिवक्ता और किशोर लड़कियों ने पांच पैनल में चर्चा की। इस दौरान उन्होंने वैश्विक स्तर पर लड़कियों के जीवन को बदलने के लिए स्वास्थ्य और पोषण, यौन और प्रजनन स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास और आर्थिक अवसर, हिंसा से सुरक्षा, जलवायु कार्रवाई का नेतृत्व करने वाली लड़कियां पर चर्चा की।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने मजबूत परिवार, संपन्न समुदाय और समृद्ध अर्थव्यवस्था बनाने के लिए युवा महिलाओं को सशक्त बनाने पर जोर दिया। शिखर सम्मेलन में भारत में कनाडा के उप उच्चायुक्त पैट्रिक हेबर्ट, यूएन वुमन की उप देश प्रतिनिधि कांता सिंह, यूथ की आवाज के संस्थापक अंशुल तिवारी और ‘कूल द ग्लोब’ एप की संस्थापक प्राची शेवगांवकर सहित अन्य लोगों ने अपनी बात रखी। हेवर्ट ने कहा कि लड़कियों को सशक्त बनाना सिर्फ एक उद्देश्य नहीं है,
यह सभी की जिम्मेदारी है। यदि सभी मिलकर प्रयास करते हैं तो इन्हें आगे बढ़ने का मौका मिल सकता है। वहीं इस मौके पर गर्ल अप इंडिया की कंट्री डायरेक्टर अदिति अरोड़ा ने कहा कि लैंगिक समानता के लिए ऐसे आयोजनों की जरूरत है।

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