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सिर्फ 40 प्रतिशत दिव्यांगता पर नहीं रुकेगा दाखिला

Admission will not stop only on 40 percent disability
ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। एमबीबीएस एडमिशन पर सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों को बड़ी राहत देने वाला फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत का कहना है कि कोई स्टूडेंट 40 फीसदी दिव्यांग है, इस आधार पर उसे मेडिकल की पढ़ाई करने से रोक नहीं सकते। न ही मेडिकल कॉलेज इनका दाखिला रोक सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ 40 प्रतिशत दिव्यांगता का तय मानक किसी को मेडिकल एजुकेशन पाने से नहीं रोकता है। सिर्फ दिव्यांगता के आधार पर किसी को मेडिकल कोर्स करने से नहीं रोका जा सकता है। बल्कि इसके लिए एक्सपर्ट की रिपोर्ट होनी चाहिए कि दिव्यांगता के कारण अभ्यर्थी कोर्स कर पाने में असमर्थ है।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बीआर गवई की अगुवाई वाली बेंच ने इस मामले में 18 सितंबर को आदेश पारित किया था और अब इस आदेश का विस्तार से कारण बताया।

कोर्ट ने ऐसा क्यों कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने एक उम्मीदवार को एमबीबीएस कोर्स में प्रवेश लेने की अनुमति दी थी, क्योंकि मेडिकल बोर्ड ने कहा था कि वह बिना किसी बाधा के मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने में समर्थ है। पीठ ने कहा कि दिव्यांग उम्मीदवार की एमबीबीएस कोर्स में पढ़ाई करने की क्षमता की जांच विकलांगता मूल्यांकन बोर्ड द्वारा की जानी चाहिए। सिर्फ निर्धारित मानक की दिव्यांगता के आधार पर अभ्यर्थी को एमबीबीएस कोर्स में दाखिला के लिए अयोग्य नहीं बताया जा सकता है। शीर्ष अदालत ने कहा कि ‘इसके लिए बोर्ड को यह बताना होगा कि दिव्यांगता के कारण एमबीबीएस कोर्स की पढ़ाई में अभ्यार्थी के लिए वह दिव्यांगता बाधा बनेगी या नहीं।’

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने ओमकार नाम के स्टूडेंट की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान यह फैसला दिया है। याचिका में ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेग्युलेशन 1997 को चुनौती दी गई थी, जिसमें 40 फीसदी या उससे अधिक दिव्यांगता वाले अभ्यार्थी को एमबीबीएस में एडमिशन से रोकने का प्रावधान किया गया है।

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