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अब लैंडफिल साइट पर बनेगा अंतरराज्यीय बस अड्डा

An inter-state bus terminal will now be built at the landfill site.
ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। दिल्ली के कूड़े के पहाड़ों में से एक भलस्वा लैंडफिल के स्थान पर अंतरराज्यीय बस अड्डा बनाने की तैयारी है, जिससे बाहरी दिल्ली की ओर से मध्य दिल्ली तक आती बसों को वहीं रोका जा सके। इसे लेकर दिल्ली सरकार और एमसीडी ने संभावनाओं को टटोलना शुरू कर दिया है। एमसीडी ने इस वर्ष के अंत तक भलस्वा कूड़े के पहाड़ को समाप्त करने का लक्ष्य तय किया है।
दिल्ली सरकार के एक अधिकारी के अनुसार, इस अंतरराष्ट्रीय बस अड्डे का निर्माण होने पर हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, जम्मू-कश्मीर व चंडीगढ़ की बसों को ठहराव मिलेगा। इससे दिल्ली की सड़कों के साथ ही कश्मीरी गेट स्थित अंतरराज्यीय बस अड्डे को सैकड़ों बसों के दबाव से राहत मिलेगी।
ऐसा कर वायु प्रदूषण से राहत के मोर्चे पर दिल्ली सरकार एक कदम आगे बढ़ेगी। इस प्रस्ताव पर दिल्ली सरकार तथा एमसीडी के अधिकारियों के बीच चर्चा हुई तथा उस पर अधिकारियों को संभावनाएं टटोलने को कहा गया है। जल्द ही इससे संबंधित विस्तृत प्रस्ताव तैयार होगा।
बाहरी दिल्ली में स्थित भलस्वा लैंडफिल का क्षेत्रफल 70 एकड़ से अधिक है। वर्ष 1994 से बनी इस समस्या को खत्म करने के काम में तेजी से एमसीडी जुटी हुई है। 60 मीटर से अधिक ऊंचाई तक पहुंच इस लैंडफिल साइट को बायो-माइनिंग के माध्यम से हटाने का काम जारी है।
एमसीडी ने दिसंबर 2026 तक इसे पूरी तरह से समाप्त करने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए ड्रोन सर्वे के माध्यम से प्रगति पर निगरानी रखी जा रही है। हाल ही में एमसीडी सदन के नेता प्रवेश वाही ने स्थलीय निरीक्षण किया था तथा दावा किया था कि भलस्वा लैंडफिल साइट पर बायो-माइनिंग की दैनिक क्षमता को लगातार बढ़ाया गया है, जो अब 15 हजार टन प्रतिदिन (टीपीडी) तक पहुंच चुकी है। उससे कूड़े के पहाड़ को समाप्त करने की प्रक्रिया में उल्लेखनीय तेजी आई है।
बायो-माइनिंग के परिणामस्वरूप मात्र तीन महीने में लगभग 4.5 एकड़ अतिरिक्त भूमि भी भलस्वा लैंडफिल साइट पर खाली कराई जा चुकी है। एमसीडी सूत्रों ने कहा कि दिल्ली सरकार से इस मामले को लेकर विस्तार से चर्चा हुई है। इसके बन जाने से दूसरे राज्यों की बसों से होते वायु प्रदूषण तथा जाम से राहत मिलेगी।

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