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दिवाली के बाद झारखंड-महाराष्ट्र में हो सकते हैं विधानसभा चुनाव

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ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर और हरियाणा के बाद महाराष्ट्र और झारखंड में विधानसभा चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। झारखंड में विधानसभा चुनाव कराने से पहले यहां चुनावी तैयारियों का रिव्यू करने के बाद चीफ इलेक्शन कमिश्नर राजीव कुमार के नेतृत्व में आयोग महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव कराने से पहले वहां की स्थिति का जायजा लेगा। इसके बाद आयोग तय करेगा कि इन दोनों राज्यों में चुनाव कब कराए जाएं। उम्मीद जताई जा रही है कि दोनों राज्यों के लिए दिवाली के बाद चुनाव करवाने की घोषणा हो सकती है।

8 अक्टूबर के बाद हो सकता है एलान
आयोग के सूत्रों का कहना है कि वैसे तो इसका अंतिम फैसला आयोग ही करेगा, लेकिन एक अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर में अंतिम तीसरे चरण की और हरियाणा में पांच अक्टूबर को होने वाले मतदान के बाद आयोग कभी भी इन दोनों राज्यों के लिए चुनावों की घोषणा कर सकता है। इसमें भी अधिक संभावना 8 अक्टूबर को रिजल्ट आने के बाद एलान करने की है।

आयोग करेगा स्थितियों की समीक्षा
सूत्रों ने बताया कि चीफ इलेक्शन कमिश्नर राजीव कुमार, इलेक्शन कमिश्नरों ज्ञानेश कुमार और डॉक्टर एस. एस. संधु महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव कराने की तमाम स्थितियों की समीक्षा करेंगे। यहां महाराष्ट्र के सीईओ, पुलिस चीफ और सरकार के अन्य तमाम आला अधिकारियों के अलावा तमाम राजनीतिक दल और अन्य लोगों से डिटेल में बात करने के बाद ही राज्य में चुनावी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। 288 सीटों वाले महाराष्ट्र में इससे पहले 2019 का चुनाव हरियाणा के साथ कराया गया था। महाराष्ट्र विधानसभा का कार्यकाल 26 नवंबर को खत्म हो रहा है। इससे पहले आयोग को यहां चुनाव संपन्न कराने हैं।

झारखंड में रिव्यू कर चुका है आयोग
महाराष्ट्र में जाकर इलेक्शन रिव्यू करने से पहले आयोग ने 23 और 24 सितंबर को रांची जाकर झारखंड में विधानसभा चुनाव कराने का रिव्यू किया था। विभिन्न राजनीतिक दलों ने अक्टूबर-नवंबर में दिवाली, छठ, दुर्गा पूजा और राज्य स्थापना दिवस जैसे मामले उठाते हुए कहा था कि इन दिनों मतदान की तारीख ना रखी जाए।

झारखंड विधानसभा का कार्यकाल 5 नवंबर 2024 को खत्म होगा। ऐसे में अभी झारखंड में विधानसभा चुनाव कराने में आयोग को समय मिल रहा है। ऐसे में यहां नवंबर के अंतिम हफ्ते से दिसंबर के बीच में चुनाव संपन्न कराए जा सकते हैं। वैसे तो राज्य में अब नक्सलवाद की बड़ी समस्या नहीं है, लेकिन फिर भी आयोग नक्सलवाद समेत तमाम तीज-त्योहारों और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए यहां चुनावों की तारीखों का एलान करेगा।

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