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भिवानी की बॉक्सर पूजा बोहरा रिकॉर्ड 10वीं बार नेशनल चैंपियन

Bhiwani boxer Pooja Bohra becomes National Champion for a record 10th time
ब्लिट्ज ब्यूरो

भिवानी। हरियाणा के भिवानी की पूजा बोहरा नेशनल लेवल पर सीनियर कैटेगरी में 10 खिताब जीतने वाली भारत की पहली महिला मुक्के बाज बन गई हैं। पहले भिवानी की ही कविता चहल के नाम यह रिकॉर्ड रहा। उन्होंने 9 बार नेशनल खिताब जीते।

ग्रेटर नोएडा में हाल ही में समाप्त हुई 9वीं एलीट महिला नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में पूजा ने 75-80 किलो भार वर्ग में गोल्ड मेडल जीता। उन्होंने फाइनल में रोहतक की नैना को 5-0 से हराया। नैना यूथ चैंपियन रही हैं। प्रतियोगिता के बाद भिवानी लौटी पूजा का जोरदार स्वागत हुआ।

पूजा का यहां तक का सफर काफी संघर्षपूर्ण रहा। शुरुआत में परिवार से छिपकर बॉक्सिंग प्रैक्टिस की। फिर दिवाली पर हाथ में पटाखा फट गया। हाथ जल गए। उसके बाद कंधे में चोट लगी। यही नहीं, पूजा शादी के बाद फिर रिंग में लौटीं। हर बार कमबैक किया। मीडिया से बातचीत में पूजा ने अपने 17 साल के सफर के अनुभव साझा किए।

पिता को बॉक्सिंग पसंद नहीं थी: पूजा के पिता राजबीर सिंह बोहरा पुलिस में थे। मां दमयंती घरेलू महिला हैं। पूजा ने 2009 में स्पोर्ट्स शुरू किया। उस समय परिवार भी इतना जागरूक नहीं था। आसपास के लोग भी लड़कियों के खेल को सहजता से नहीं लेते थे। पिता को बॉक्सिंग गेम ही पसंद नहीं था। मां को भी लगता था कि बेटी बॉक्सिंग करेगी तो कहीं उसे चोट न लग जाए।

कोच की पत्नी ने पहचाना हुनर: पूजा ने पहले इंटर कॉलेज तक बास्केटबॉल खेला, कुछ और भी खेल आजमाए। इसी दौरान आदर्श गर्ल्स कॉलेज में कोच संजय श्योराण की पत्नी मुकेश श्योराण को लगा कि यह लड़की तो बॉक्सिंग में अच्छा कर सकती है। बस ग्लव्स मिले और बॉक्सिंग शुरू हो गई।
एक साल तक घर नहीं बताया: एक साल तक पूजा ने बॉक्सिंग को लेकर घर में ज्यादा कुछ नहीं बताया। पूजा की आंख के ऊपर चोट लग गई, काफी खून बहा। पूजा को लगा कि घर गई तो पक्क ा उसका गेम छुड़वा देंगे। इसके बाद कोच के घर पर ही तीन-चार दिन रही। कोच की पत्नी ने मां से बात की कि कोच साहब घर पर नहीं हैं, पूजा को अपने पास ही रख रही हूं दो-तीन दिन के लिए। जब आंख नॉर्मल हो गई तो घर गई।

पिता को पता चला तो साफ कह दिया- कल से बॉक्सिंग बंद। पूजा ने बताया कि शुरुआत में पापा को नहीं पता था कि मैंने बॉक्सिंग की ट्रेनिंग शुरू कर दी। जब पता चला तो साफ मना कर दिया-कल से बॉक्सिंग करने नहीं जाएगी। गेम करना है तो कोई और कर ले। फिर कोच ने पापा को मिलने बुलाया। कोच ने समझाया कि लड़की के पंच में दम है, ये कामयाब हो सकती है। तब पिता कुछ राजी हुए।

दिवाली पर हाथ में पटाखा फटा, लगा करियर खतरे में पड़ गया
2016 में दिवाली पर पूजा के हाथ में ही पटाखा फट गया। हाथ झुलस गए। उस दौरान नेशनल चैंपियनशिप होनी थी, जिसमें पूजा खेल नहीं पाई। उसके बाद रेस्ट के दौरान पूजा के कंधे में भी इंजरी हो गई। यहीं से पूजा का स्ट्रगल स्टार्ट हुआ। तब लगा कि पूजा अब खेल नहीं पाएगी। इंजरी से उभरने में डेढ़ साल लग गया। उसने फिर कमबैक किया।

शादी के बाद रिंग में लौटीं
फरवरी 2023 में पूजा की शादी जींद निवासी आकाश सिंहमार से हुई। पति का कोई स्पोर्ट्स बैकग्राउंड नहीं है। तब भी खेल जगत को लगा कि अब पूजा रिंग में नहीं लौटेंगी। शादी के कुछ महीने बाद ही पूजा ने कम बैक किया और दिसंबर 2023 में नेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड जीता।
पूजा कहती हैं-आपका एक अच्छा प्लेयर होना ही मायने नहीं रखता। आपका सपोर्ट सिस्टम कैसा है, वह भी काफी मायने रखता है। इसमें सास सरला देवी और पति आकाश ने मेरा पूरा सहयोग किया।

पूजा बोहरा की 4 अहम बातें
महसूस करो कि हमसे अच्छा कोई नहींः पूजा ने कहा- कोच संजय श्योराण काफी अच्छी टेक्नीक सिखाते हैं। वे माइंड भी ऐसा बना देते हैं कि हमें यह लगता है कि हमसे अच्छा कोई नहीं है। स्टार्टिंग में भी ऐसा ही था कि मुझे एक साल में ही यूं लगने लग गया था कि मेरे से अच्छा कोई नहीं है, लेकिन धीरे-धीरे रियल बॉक्सिंग को फेस किया तब लगा कि लगातार मेहनत की जरूरत है। मेडल आने लगे तो सबका नजरिया बदलाः उन्होंने कहा कि स्टेट चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने के बाद अच्छे दिनों की शुरुआत हुई। लोगों का नजरिया भी बदलने लगा। नेशनल में शुरुआत के एक साल मेडल नहीं जीत पाई। इसके बाद धीरे-धीरे मेडल आने स्टार्ट हो गए।

फैमिली का सपोर्ट है तो हर लड़ाई आसानः पूजा ने कहा कि फैमिली सपोर्ट कर रही हो तो बाकी कुछ मैटर नहीं करता। शुरुआत में परिवार को लगता था कि बॉक्सिंग खेल खतरनाक है। कहीं चोट न लग जाए, लेकिन बाद में बहुत सपोर्ट मिला। जब कभी 17 साल के सफर को देखती हूं तो लगता है कि खिलाड़ी के लिए सबसे मुश्किल टाइम वह होता है, जब वह करना चाहता है और कर नहीं पा रहा। जैसे कोई इंजरी हो जाए।

जो ठान लो, उसे करके दिखाओः आखिर में उन्होंने कहा कि जो लड़की खिलाड़ी बनना चाहती हैं, उनको के लिए बस यही राय है कि जो ठान लो, उसे करके दिखाओ। आजकल परिवार काफी जागरूक हो चुके हैं। यह देखना चाहिए कि कौन कोच अच्छे हैं और कौन-सी एकेडमी अच्छी है। यह अच्छे से निर्णय लेकर ही अपना गेम स्टार्ट करना चाहिए।

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