ब्लिट्ज ब्यूरो
भाजपा ने महज 45 साल की उम्र में पार्टी के सर्वोच्च पद पर नबीन को चुनकर देश भर के 18-29 आयु वर्ग के 21.7 करोड़ युवा मतदाताओं और अपने युवा कार्यकर्ताओं को यह संदेश तो दे ही दिया है कि भाजपा नौजवानों की सोच को भरपूर अहमियत देती है।
45 साल की भारतीय जनता पार्टी को 45 साल का बारहवां नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल चुका है। 20 जनवरी को औपचारिक रूप से नितिन ने ‘नबीन’ पद की जिम्मेदारी संभाल ली। 20 जनवरी को ही भाजपा की स्थापना के 45 साल पूरे हुए हैं। पार्टी के इतिहास में इस संयोग को संगठन के भीतर पीढ़ीगत बदलाव और भविष्य की राजनीति की दिशा के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। युवा ऊर्जा और अनुभव के संतुलन के साथ नितिन नबीन सिन्हा से पार्टी को नई राजनीतिक ऊंचाइयों तक ले जाने की उम्मीद जताई जा रही है। नितिन नबीन ने सक्रिय राजनीति में कदम रखने के बाद एक सधे हुए संगठनात्मक कार्यकर्ता व चुनावी रणनीतिकार के रूप में अपनी पहचान को स्थापित किया। नितिन दिवंगत वरिष्ठ भाजपा नेता नबल किशोर सिन्हा के पुत्र हैं। पिता के निधन बाद 2006 में पटना पश्चिम सीट से उपचुनाव जीतकर नितिन नबीन पहली बार विधानसभा पहुंचे। 2010, 2015, 2020 और 2025 में लगातार जीत दर्ज कर वे पांच बार विधायक बने। बिहार विधानसभा में उनकी यह निरंतरता पार्टी के लिए भरोसे का मजबूत आधार मानी जाती है।
2016 से 2019 तक बिहार भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने जमीनी कार्यकर्ताओं का मजबूत नेटवर्क तैयार किया। इसके बाद वे भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव बने। संगठन में प्रभाव बढ़ने के बाद पार्टी ने उन्हें बिहार से बाहर भी अहम जिम्मेदारियां सौंपीं। सिक्कि म में संगठन प्रभारी और फिर छत्तीसगढ़ के सह-इंचार्ज के रूप में नबीन ने चुनावी प्रबंधन की कमान संभाली। छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव उनके राजनीतिक करियर का निर्णायक मोड़ माना जाता है। जब अधिकतर सर्वे कांग्रेस की वापसी का अनुमान लगा रहे थे तब भाजपा ने नितिन नबीन पर भरोसा जताया। भाजपा ने छत्तीसगढ़ में स्पष्ट बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की। संगठन के भीतर नितिन नबीन को ऐसा नेता माना जाता है जो नेतृत्व की सीमाओं को समझता है और वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर चलने की क्षमता रखता है।
नितिन को निवर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा से एक ऐसी पार्टी विरासत में मिली है जिसने विगत वर्षों में अभूतपूर्व तरीके से विस्तार किया है। नवीन पार्टी के इतिहास में राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभालने वाले सबसे युवा नेता हैं जिन पर नेताओं की एक नई पीढ़ी को बढ़ावा देने की भी जिम्मेदारी है। जब पिछले महीने भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में उनकी नियुक्ति हुई तो इसे एक चौंकाने वाले निर्णय के रूप में भी देखा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित यदि भाजपा के तमाम नेता यह दावा करते हैं कि उनकी पार्टी में एक साधारण कार्यकर्ता भी अपने काम और समर्पण के बल पर शिखर तक पहुंच सकता है तो नितिन नबीन उसकी बेहतरीन मिसाल हैं। यही तथ्य भाजपा को उन राजनीतिक दलों से अलग बनाता है जिन पर परिवारवाद को बढ़ावा देने के आरोप लगाए जाते हैं । ऐसे समय, जब तमाम राजनीतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र को लेकर सवाल उठते हैं, विभिन्न पार्टियों के लिए नितिन नबीन की ताजपोशी एक मिसाल हो सकती है। साथ ही नितिन की उम्र और पृष्ठभूमि पार्टी को युवा पीढ़ी से जोड़ने का मजबूत माध्यम बन सकती है। यह इसलिए जरूरी है क्योंकि वह एक ऐसी पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं जो जेन-जी मतदाताओं के बीच काम कर रही है लेकिन जिसकी संरचना जेन-एक्स जैसी है।
ऐसी दशा में भाजपा के पदाधिकारियों के चयन में युवा एवं अनुभवी नेताओं का सही संतुलन बनाए रखना भी नबीन के लिए चुनौतीपूर्ण काम है। इसके अतिरिक्त उनके समक्ष कई राज्यों में आने वाले चुनाव भी बड़ी चुनौतियां हैं। उन्होंने ऐसे समय में पार्टी का नेतृत्व संभाला है जब इस वर्ष पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इनमें से पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल में भाजपा आज तक चुनाव में विजय प्राप्त नहीं कर सकी है। इस दृष्टि से अगर देखा जाए तो नबीन की रणनीतिक और सांगठनिक क्षमता का लिटमस टेस्ट भी शीघ्र ही देखने को मिलेगा। फिर भी एक बात तो साफ है कि भाजपा ने महज 45 साल की उम्र में पार्टी के सर्वोच्च पद पर नबीन को चुनकर देश भर के 18-29 आयु वर्ग के 21.7 करोड़ युवा मतदाताओं और अपने युवा कार्यकर्ताओं को यह संदेश तो दे ही दिया है कि भाजपा नौजवानों की सोच को भरपूर अहमियत देती है और आने वाले दिनों में पार्टी के पास उनके लिए बहुत सारे अवसर हैं। साथ ही भाजपा के अनुभवी नेता भी युवा नेतृत्व को स्वीकार करने में नहीं हिचकते हैं। यह बात प्रधानमंत्री मोदी के इस वक्तव्य से भी साफ हो जाती है कि पार्टी के मामलों में वह भी सिर्फ कार्यकर्ता हैं और नबीन उनके बॉस।

