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बमों के जाल, गोलियों की बारिश के बीच सी 60 कमांडोज व महिला पायलट ने दिखाया कमाल

Story of bravery of Gadchiroli Naxal operation
ब्लिट्ज ब्यूरो

मुंबई। महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ में पांच नक्सलियो को मार गिराया। मुठभेड़ छत्तीसगढ़ के नारायणपुर की सीमा से लगे इलाके में हुई। गढ़चिरौली पुलिस की सी-60 कमांडो टीम और सीआरपीएफ की टीम ने इस अभियान को अंजाम दिया। गढ़चिरौली के पुलिस अधीक्षक (एसपी) ऑफिस से जारी बयान में कहा गया है कि 20 नवंबर को होने वाले चुनाव के मद्देनजर नक्सलियों का एक समूह पिछले दो दिनों से महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमा पर जंगल में इकट्ठा हुआ था और हमले की योजना बना रहा था। जिस इलाके में यह जमावड़ा हो रहा था, वह छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के नक्सल प्रभावित जिले नारायणपुर की सीमा पर है।

2 टीमों ने पूरा इलाका घेरा
महाराष्ट्र सीमा पर स्थित अंतिम गांव कोपरशी से 6 किलोमीटर दूर दंडकारण्य के जंगलों के चट्टानी, खतरनाक इलाके में आठ घंटे तक यह मुठभेड़ चली। सीनियर अधिकारियों की निगरानी में सी-60 कमांडो की 22 टीमें और सीआरपीएफ के दो दस्तों ने जंगल क्षेत्र में दो अलग-अलग जगहों से अभियान चलाया। जैसे ही पुलिस और सीआरपीएफ के जवान उस इलाके में पहुंचे जहां नक्सली इकट्ठा हुए थे, उन्हें नक्सलियों की ओर से अंधाधुंध गोलीबारी का सामना करना पड़ा। सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत जवाबी कार्रवाई की और इसके बाद हुई गोलीबारी में पांच नक्सली मारे गए। जंगल में तलाशी अभियान जारी रहा।

महिला पायलट ने किया कमाल
जॉइंट अभियान में कम से कम 2,500 राउंड फायर किए गए, जो गोला-बारूद और पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) के पांच सदस्यों के शव बरामद करने के बाद सूर्यास्त से पहले समाप्त हो गया। मुठभेड़ में एक महिला पायलट ने अभूतपूर्व साहस दिखाया। महिला पायलट ने मुठभेड़ स्थल से कुछ ही फीट ऊपर अपना पवन हंस हेलिकॉप्टर उतारा और एक घायल कमांडो को एयरलिफ्ट किया। गुरिल्ला अपने गढ़ से रॉकेटों की बौछार कर रहे थे। जंगल के बीच ऊबड़-खाबड़ इलाके में हेलिकॉप्टर उतरने में असमर्थ था। घायल जवान को रस्सी के सहारे नीचे की ओर उड़ते हुए हेलिकॉप्टर में खींचा गया और गढ़चिरौली के रास्ते नागपुर ले जाया गया। जवान का इलाज किया जा रहा था। डॉक्टरों ने बताया कि उसे तीन गोलियां लगी हैं और उसकी हालत गंभीर है।

तीन महिला कैडर भी ढेर
मारे गए गुरिल्लाओं में तीन महिला कैडर शामिल थीं, जो माओवादियों की कंपनी 10 के गठन का हिस्सा थीं। इस समूह को मध्य भारत में माओवादियों के मुख्य केंद्र अबूझमाड़ के घने जंगल और ऊबड़-खाबड़ इलाकों की रखवाली का काम सौंपा गया है।

भाग निकला पीएलजीए का टॉप कमांडर प्रभाकरण
मुठभेड़ रेड कॉरिडोर के छत्तीसगढ़ की ओर अबूझमाड़ के जंगलों में 7 किलोमीटर की दूरी पर हुई। सी-60 और सीआरपीएफ के कमांडो तीन दिन पहले अंदर घुसे और माओवादी गढ़ की रक्षा करने वाले गुरिल्लाओं और उनके शीर्ष कमांडरों से भिड़ने से पहले चुपचाप इलाके में बारूदी सुरंगों की तलाशी ली। सूत्रों ने बताया कि गढ़चिरौली डिवीजन का नेतृत्व करने वाला पीएलजीए का टॉप नेता प्रभाकरण अपने बॉडीगार्ड्स के सुरक्षा घेरे में छिपकर वहां से भाग निकला। कमांडो अपनी ‘सर्कुलर कट-ऑफ’ रणनीति का इस्तेमाल करके गुरिल्लाओं को घेरने की प्रक्रिया में थे, तभी कंपनी 10 के गठन के सशस्त्र विद्रोहियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। प्रभाकरण भाग गया, जबकि उसके साथियों को कमांडो की गोलियों का सामना करना पड़ा।

अमित शाह के निर्देश पर एक्शन
चुनाव पूर्व सुरक्षा रणनीति के तौर पर हुए इस ऑपरेशन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश का भी पालन किया गया। उन्होंने छत्तीसगढ़ के लिए मार्च 2026 और महाराष्ट्र के लिए दिसंबर 2025 तक अपने राज्यों से माओवाद का सफाया करने की डेडलाइन दी है। ग्राउंड जीरो पर इंसास राइफल, एके राइफल और अन्य असॉल्ट राइफल जैसे अत्याधुनिक हथियार, गोला-बारूद, मैगजीन, वॉकी-टॉकी, डेटोनेटर वायर, विस्फोटक और अन्य सामग्री बरामद की गई।

ऐसे टीम ने किया काम
खुफिया इनपुट के बाद, कमांडो टीमों ने छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में प्रवेश करने के लिए कोपरशी नाले को पार किया। दस्ते के एक हिस्से का नेतृत्व अतिरिक्त एसपी यतीश देशमुख ने किया, जबकि दूसरे का नेतृत्व अतिरिक्त एसपी एम रमेश ने किया। देशमुख ने महाराष्ट्र सीमा से 2 किमी दूर टेकामेटा गांव के पास पीएलजीए से मुकाबला किया और अतिरिक्त एसपी रमेश ने छत्तीसगढ़ के अंदर 7 किमी दूर कोधुर गांव के पास गुरिल्लाओं को घेर लिया।

गुपचुप बैठक के बाद सीक्रेट ऑपरेशन
एसपी गढ़चिरौली नीलोत्पल ने कहा कि अबूझमाड़ मुठभेड़ चुनाव पूर्व सुरक्षा अभ्यास का हिस्सा थी जिसका उद्देश्य महाराष्ट्र सीमा के बाहरी इलाकों से माओवादियों को खदेड़ना था। उन्होंने कहा, ‘आगामी चुनाव की पृष्ठभूमि में ऑपरेशन की योजना बनाई गई थी।’ एक सप्ताह पहले महाराष्ट्र की डीजीपी रश्मि शुक्ला और सीआरपीएफ के डीजीपी अनीश दयाल सिंह ने गढ़चिरौली में बैठक की थी, जहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशानुसार ऑपरेशन अबूझमाड़ का खाका तैयार किया गया था। बैठक में राज्य के नक्सल विरोधी ऑपरेशन सेल के प्रभारी संदीप पाटिल, नक्सल रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक अंकित गोयल और छत्तीसगढ़ के कई शीर्ष अधिकारी मौजूद थे। गढ़चिरौली पुलिस अब मारे गए पीएलजीए लड़ाकों के शवों की पहचान करने की कोशिश कर रही है।

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