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बच्चों को खिलौने, महिलाओं को साड़ी-सूट, सब फ्री मिलता है मुंबई के एक मॉल में

ब्लिट्ज ब्यूरो

मुंबई। किसी को कैसे बताएं जरूरतें अपनी, अक्सर यह उलझन मदद मांगने से रोकती है। मगर मुंबई के वर्सोवा वेलफेयर एसोसिएशन के ‘फ्री मॉल’ ने जरूरतमंदों की यह उलझन सुलझा दी है। मदद की असहज स्थिति को आत्मसम्मान से भर दिया है। साल में दो बार सजने वाले इस मॉल में अलग-अलग कैटिगरी में चीजों को रखा जाता है। जरूरतमंदों ने कहा, ‘पहली बार लगा हम मांग नहीं, अपनी पसंद से चुन रहे हैं’
साल में दो बार सजता है ये मॉल
मुंबई में सात साल पहले ‘फ्री मॉल’ की शुरुआत हुई थी, जहां से लोग इस्तेमाल किए हुए और नए कपड़े मुफ्त में ले जाते हैं। बिना दाम के बच्चे खिलौने, चप्पल-जूते, महिलाएं साड़ी, सूट, चादर, बर्तन, युवक पैंट, टी-शर्ट, जर्सी, पर्स, बेल्ट, ब्लेजर और शेरवानी तक ले जाते हैं। साल में दो बार सजने वाले इस मॉल में एक बार में 20 से 25 लोगों को अंदर जाने की अनुमति दी जाती है। मॉल में अलग-अलग श्रेणियों में चीजों को रखा और सजाया जाता है। यहां से एक व्यक्ति अपनी पसंद के कोई भी चार आइटम चुन सकता है। मॉल में अलग ट्रायल रूम भी बनाया जाता है।
सालभर जुटाते हैं सामान
एसोसिएशन में अहम भूमिका निभाने वालीं एडवोकेट पिंकी भंसाली बताती हैं कि हमारा उद्देश्य हाशिए पर पड़े समाज को सम्मानजनक जीवन की ओर ले जाना है। यह मॉल अब तक मुंबई के वर्सोवा, यारी रोड, चार बंगला इलाके में सजाया जा चुका है। अंधेरी के अलग-अलग हिस्सों में भी मॉल लगाया जाता है। एसोसिएशन के वॉलंटियर और सदस्य सालभर मॉल के लिए अलग-अलग जगह से सामान जुटाते हैं।
ऐसे आया आइडिया
एसोसिएशन ने देखा कि बहुत से समृद्ध लोगों के घर में ऐसी चीजें हैं, जो खराब नहीं हुई हैं। वे गरीब लोगों को मुफ्त में देना चाहते हैं, लेकिन ऐसे लोग मांगने में हिचकिचाते हैं। तब सीनियर एडवोकेट गोपाल कृष्णा हेगड़े के मन में ‘फ्री मॉल’ का आइडिया आया। हेगड़े के अनुसार, मॉल में लोग बेहिचक आते हैं। लोग अपना सामान चुनते हैं और काउंटर पर पैक कराके चले जाते है।

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