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‘सीवरेज टैंक कर्मियों के वारिसों को समय पर मुआवजा दें’

Bombay High Court
ब्लिट्ज ब्यूरो

मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को सेप्टिक टैंक और सीवरेज में काम के दौरान जान गंवाने वाले मैनुअल एक्सकेवेंजर (हाथ से गंदगी हटाने वाले वर्कर) के कानूनी वारिसों को समय पर मुआवजा तय करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि कानूनी रूप से स्पष्ट है कि मुआवजे की रकम का भुगतान सरकार करेगी। फिर वह उसे उस ठेकेदार से वसूलेगी, जिसने लोगों को मैनुअल एक्सकेवेंजर के तौर पर काम पर रखा था, इसलिए सरकार यह आश्वस्त करे कि मुआवजे का भुगतान समय पर हो।
सुनवाई के बीच देश में साल 1993 से अक्टूबर 2025 तक 1327 मैनुअल एक्सकेवेंजर की मौत का खुलासा हुआ है। कोर्ट ने मौत और पेंडिंग मुआवजे के मुद्दे पर चिंता जाहिर की। श्रमिक जनता संघ ने कोर्ट में याचिका दायर की है। जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजूषा देशपांडे की बेंच के सामने याचिका पर सुनवाई हुई। बेंच को कल्याण-डोंबिवली महानगर पालिका (केडीएमसी) में यह काम करते रितिक कुरकुटे की करंट लगने से मौत की जानकारी दी गई। सीनियर एडवोकेट गायत्री सिंह ने बेंच को बताया कि सेप्टिक टैंक और सीवरेज की सफाई करने वाले लोगों की सेफ्टी पर ध्यान नहीं दिया जाता है।
5 फरवरी को होगी अगली सुनवाई
इस पर बेंच ने सरकारी वकील से पूछा कि क्या कुरकुटे को मुआवजा दिया गया है। जवाब में सरकारी वकील ने कहा कि उन्हें इस बारे में निर्देश लेने के लिए समय दिया जाए। सरकार इस मुद्दे को अपने विरोध के तौर पर नहीं देखती। मैनुअल एक्सकेवेंजर के उत्थान के लिए हर संभव कदम उठाएगी। इन दलीलों के मद्देनजर बेंच ने याचिकाकर्ता के वकील को मैनुअल एक्सकैवेंजर से जुड़े कानून के अमल से जुड़ी व्यवहारिक दिक्कतों को दूर करने के लिए सुझाव देने के लिए कहा।
कोर्ट ने समय पर मुआवजे
पर क्यों दिया जोर?
मैनुअल एक्सकेवेंजर के पुनर्वास के लिए सरकार ने साल 2013 में कानून बनाया था, जो उनके एम्प्लॉयमेट पर रोक लगाता है। मुआवजे के मुद्दे और अन्य विषयों पर सरकार को निर्देश जारी किए हैं, जिनके अमल से न सिर्फ मैनुअल एक्सकेवेंजर के हित सुरक्षित होंगे, बल्कि उनका वेलफेयर भी प्रभावी ढंग से सुनिश्चित होगा। इसके साथ ही सेप्टिक टैंक और सीवरेज सफाई के लिए लोगों की नियुक्ति करने वाले ठेकेदारों पर मुआवजे के लिए शिकंजा कसा जा सकेगा।

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