ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ ) ने भारत की सैन्य शक्ति को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाई देते हुए हाइपरसोनिक मिसाइल कार्यक्रम में एक ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। हैदराबाद स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (डीआरडीएल) ने अपने अत्याधुनिक केंद्र में ‘एक्टिवली कूल्ड लॉन्ग ड्यूरेशन स्क्रैमजेट इंजन’ का सफल ग्राउंड परीक्षण संपन्न किया। इस परीक्षण के दौरान इंजन ने 12 मिनट से अधिक का रन टाइम हासिल किया, जो तकनीकी रूप से एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। यह सफल परीक्षण अप्रैल 2025 में किए गए पिछले सबस्केल परीक्षणों का उन्नत चरण है, जिसने अब पूर्ण पैमाने (फुल स्केल) पर अपनी क्षमता साबित कर दी है। इस तकनीक के सफल होने से भारत अब ऐसी हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइलें बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जो स्पीड की रफ्तार से पांच गुना अधिक यानी 6,100 किमी/घंटा की रफ्तार से उड़ान भर सकेंगी। पूरी तरह स्वदेशी रूप से डिजाइन किए गए इस इंजन ने भारत को दुनिया के उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर दिया है जिनके पास उन्नत एयरोस्पेस क्षमताएं मौजूद हैं।
क्या है स्क्रैमजेट तकनीक और क्यों कांपेंगे दुश्मन?
’स्क्रैमजेट’ का अर्थ है सुपरसोनिक कंबशन रैमजेट। यह एक ‘एयर-ब्रीदिंग’ इंजन है जो रॉकेट की तरह भारी ऑक्सीजन टैंक साथ ले जाने के बजाय सीधे वायुमंडल से ऑक्सीजन खींचता है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह सुपरसोनिक गति (ध्वनि से तेज) पर भी हवा और ईंन्धन के मिश्रण को जलाकर निरंतर थ्रस्ट पैदा करता है। चीन और पाकिस्तान के लिए यह तकनीक एक बड़ा रणनीतिक सिरदर्द बनने वाली है। वर्तमान में दुनिया का कोई भी मिसाइल डिफेंस सिस्टम 6,100 किमी/घंटा की रफ्तार से आती मिसाइल को रोकने में सक्षम नहीं है। रडार को जब तक खतरे का पता चलेगा तब तक मिसाइल अपना काम कर चुकी होगी। यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ की वह ताकत है जो पलक झपकते ही दुश्मन के ठिकानों को राख करने की क्षमता रखती है।
स्क्रैमजेट इंजन साधारण रॉकेट इंजन से कैसे अलग है?
साधारण रॉकेट अपने साथ ऑक्सीजन का भारी टैंक ले जाते हैं जबकि स्क्रैमजेट इंजन वायुमंडल की हवा का उपयोग करता है। इससे मिसाइल का वजन कम होता है और वह ज्यादा लंबी दूरी तय कर सकती है।
क्या है ‘स्क्रैमजेट’ तकनीक?
हाइपरसोनिक गति पर अत्यधिक गर्मी पैदा होती है, जिससे इंजन पिघल सकता है। 12 मिनट तक इंजन का सफलतापूर्वक चलना यह साबित करता है कि भारत ने ‘एक्टिव कूलिंग’ तकनीक में महारत हासिल कर ली है।
क्या इस तकनीक को रोकना मुमकिन है?
नहीं, वर्तमान में मौजूद एस-400 जैसे उन्नत सिस्टम भी इतनी तेज गति और पैंतरेबाजी वाली हाइपरसोनिक मिसाइलों को ट्रैक करने या मार गिराने में लगभग विफल साबित होते हैं।
मिसाइल की रफ्तार कितनी होगी?
यह इंजन मिसाइल को ‘मैक 5’ से अधिक की रफ्तार देगा, जिसका मतलब है ध्वनि की गति से 5 गुना तेज या लगभग 1.7 किलोमीटर प्रति सेकेंड।

