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राजस्थान में 9,300 करोड़ के विकास कार्यों का शिलान्यास व लोकार्पण

amit sah
ब्लिट्ज ब्यूरो

जयपुर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तीन नए आपराधिक कानूनों की शुरुआत को 21वीं सदी का सबसे बड़ा सुधार बताया। उन्होंने कहा कि इससे लोगों को समय पर, आसान तरीके से और सरलता से न्याय मिलेगा।

जयपुर में नए कानूनों पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के बाद शाह ने कहा, ‘इन कानूनों के पूरी तरह से लागू होने के बाद हमारी आपराधिक न्याय प्रणाली पूरी दुनिया में सबसे आधुनिक बन जाएगी, इसका मुझे पूरा विश्वास है।’ पुरानी व्यवस्था के तहत न्याय में होने वाली देरी पर शाह ने कहा कि कुछ मामले बिना सजा के 25 से 30-30 साल तक चलते रहते थे। लोगों को समय पर न्याय नहीं मिलता था। अब इससे मुक्ति मिल जाएगी।

शाह ने कहा, मैं विश्वास के साथ बताने आया हूं कि आपराधिक न्याय प्रणाली के तीन कानून आपको समय पर, सुलभ तरीके से, सरलता से न्याय दिलाने का काम करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘ईज ऑफ लिविंग’ के लिए ढेर सारे परिवर्तन किए, साथ ही इन कानूनों के अमल के साथ ‘ईज ऑफ जस्टिस’ के लिए बहुत बड़ा परिवर्तन होगा। उन्होंने कहा, इन कानूनों के माध्यम से हमारी आपराधिक न्याय प्रणाली दंड की जगह न्याय से प्रेरित होकर काम करेगी। प्रमुख प्रावधानों पर प्रकाश डालते हुए शाह ने कहा कि नए कानून ई-एफआईआर और जीरो एफआईआर जैसी प्रणालियां पेश करते हैं, जिसका उद्देश्य शिकायत के शुरुआती चरणों को सरल बनाना है।

इससे पहले शाह ने 9,300 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का शिलान्यास व लोकार्पण किया। ‘राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट 2024’ के तहत चार लाख करोड़ की परियोजनाओं की भी शुरुआत की।

आरोप पत्र समय पर दायर होने लगे
नए कानूनों के तहत प्रकियाओं को समयबद्ध करने पर शाह ने कहा कि जब हमने समय सीमाएं तय कीं, तब सबके मन में संशय था कि क्या ऐसा हो पाएगा? लेकिन सिर्फ एक साल हुआ है, देश में 50 प्रतिशत से ज्यादा आरोप पत्र समय पर दायर होने लगे हैं। उन्होंने कहा, मुझे पूरा विश्वास है एक और साल में ये 90 प्रतिशत तक पहुंच जाएंगे।

कोर्ट में प्रत्यक्ष रूप से पेश होने की जरूरत कम
गृह मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार ने नई प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए लाखों पुलिसकर्मियों, हजारों न्यायिक अधिकारियों और फोरेंसिक प्रयोगशालाओं व जेल कर्मचारियों का प्रशिक्षण पूरा कर लिया है। शाह ने कहा कि इन सुधारों से अदालत में प्रत्यक्ष रूप से पेश होने की जरूरत कम हो जाएगी।

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