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शी मार्ट्स से लखपति दीदी तक, महिलाओं के लिए बहुत कुछ

From She Marts to Lakhpati Didis, there's a lot for women.
ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 में महिलाओं के लिए कई महत्वपूर्ण और दूरगामी घोषणाएं की हैं। उन्होंने बजट पेश करते हुए कहा कि सरकार ‘लखपति दीदी योजना’ की सफलता को आगे बढ़ाएगी साथ ही स्वयं सहायता समूहों की महिला उद्यमियों के लिए सामुदायिक स्वामित्व वाली खुदरा दुकानें स्थापित की जाएंगी। इन दुकानों को ( सेल्फ हेल्प एंटरप्रिन्योर ) शी-मार्ट्स से जाना जाएगा। इसका मकसद ग्रामीण महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए गए उत्पादों को सीधे बाजार तक पहुँचाना।
क्या है शी-मार्ट्स
निर्माला सीतारमण ने कहा कि शी-मार्ट्स कम्युनिटी-ओन्ड रिटेल आउटलेट्स होंगे। इनका मालिकाना हक और प्रबंधन पूरी तरह महिलाओं के पास होगा। बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने इसे स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के सदस्यों के लिए ”उद्यमों के मालिक” बनने की दिशा में ”अगला कदम” बताया। सीतारमण ने कहा, ” लखपति दीदी कार्यक्रम की सफलता को आगे बढ़ाते हुए, मैं महिलाओं को ऋण-आधारित आजीविका से उद्यमों की मालिक बनने की दिशा में अगला कदम उठाने में मदद करने का प्रस्ताव करती हूं।” उन्होंने बताया कि इस कदम से बिचौलियों का रोल खत्म होगा और महिलाओं को उनके उत्पादों की बेहतर कीमत मिलेगी।
लखपति दीदी को और अधिक
सशक्त बनाने का प्लान?
वहीं ‘लखपति दीदी’ कार्यक्रम की सफलता को देखते हुए इसे और अधिक सशक्त बनाया गया है। अब ध्यान केवल लोन देने पर नहीं, बल्कि महिलाओं को ‘एंटरप्राइज ओनर’ (उद्यम का मालिक) बनाने पर है। इसके लिए उन्हें नई तकनीक, जैसे ड्रोन चलाने, प्लंबिंग और एलईडी बल्ब बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। लखपति दीदी, स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) की वह महिला सदस्य होती है जिसकी वार्षिक घरेलू आय कम से कम एक लाख रुपये हो। ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, अब तक दो करोड़ से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं और लक्ष्य 2027 तक तीन करोड़ महिला एसएचजी सदस्यों की वार्षिक आय को एक लाख रुपये तक पहुंचाना है।
हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल
शिक्षा और रोजगार में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए भी इस बजट में बड़ा एलान किया गया है। बुनियादी ढांचागत सुधार के तहत देश के हर जिले में कम से कम एक गर्ल्स हॉस्टल का निर्माण किया जाएगा। यह हॉस्टल खास तौर से उन लड़कियों और कामकाजी महिलाओं के लिए काफी मददगार साबित होगा जिन्हें पढ़ाई या नौकरी के लिए अपने घर से दूर रहना पड़ता है।
निर्मला सीतारमण ने कहा कि महिला उद्यमियों को बड़े स्तर पर ले जाने के लिए सिर्फ सामान्य बैंक लोन काफी नहीं हैं। इसलिए इनोवेटिव फाइनेंसिंग इंस्ट्रूमेंट्स लाए जाएंगे, ताकि महिला-नेतृत्व वाले स्टार्ट-अप्स और समूहों को आसानी से और सस्ती दरों पर लोन मिल सके। वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों को आगे बढ़ाते हुए इस बार भी जेंडर बजट में उल्लेखनीय आवंटन किया गया है। इसका उपयोग महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण और सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं (जैसे उज्ज्वला, जल जीवन मिशन और प्रधानमंत्री आवास योजना) के एकीकरण के लिए किया जाएगा।

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