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शादी-ब्याह से लेकर अस्पताल-स्कूल, होटल तक

From weddings to hospitals, schools, hotels
ब्लिट्ज ब्यूरो

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार जल्द ही पब्लिक सेफ्टी एक्ट लागू करने वाली है। इस कानून के तहत सार्वजनिक और व्यावसायिक जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य होगा। शादी, रैली, कॉलेज, स्कूल, मॉल, रेस्टोरेंट, अस्पताल, राजनीतिक और धार्मिक कार्यक्रम, सभी जगह सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य होगा। रिकॉर्डिंग दो महीने तक रखनी होगी और पुलिस मांगे तो देनी होगी। कानून न मानने पर जुर्माना लगेगा।
बता दें कि इसकी तैयारी 2020 से चल रही थी। इंदौर में इस प्रोजेक्ट का पायलट परीक्षण सफल रहा। सितंबर 2024 में इंदौर में इस कानून को आज़माया गया। नगर निगम ने इसके लिए नियम बनाए। हज़ारों नए सीसीटीवी कैमरे लगे। व्यापारियों ने भी सहयोग किया। एक हादसे में सीसीटीवी फुटेज से ही कार चालक पकड़ा गया।

एमपी में इसकी जरूरत क्यों
मध्य प्रदेश में बढ़ती आबादी और शहरीकरण के कारण निगरानी की ज़रूरत बढ़ गई है। इसलिए सरकार पब्लिक सेफ्टी एक्ट ला रही है। इस कानून के तहत सार्वजनिक जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य होगा। इससे अपराधों पर रोक लगने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है। इस कानून का ड्राफ्ट तैयार हो चुका है और इसे विधि विभाग को जांच के लिए भेजा गया है।

– मध्य प्रदेश सरकार ला रही पब्लिक सेफ्टी एक्ट
– 2 महीने तक रखनी होगी रिकॉर्डिंग्स

कहां जरूरी हैं सीसीटीवी
इस कानून के दायरे में शादी, रैली, कॉलेज, स्कूल, मॉल, रेस्टोरेंट, अस्पताल जैसे कई स्थान आएंगे। 100 से ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने वाली जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने ज़रूरी होंगे। सीसीटीवी कैमरे लगाने का खर्च आयोजक या प्रतिष्ठान को खुद उठाना होगा।
मध्य प्रदेश की आबादी तेज़ी से बढ़ रही है। 2024 के अंत तक आबादी 8.88 करोड़ होने का अनुमान है। बढ़ती आबादी और शहरीकरण के साथ अपराध भी बढ़ रहे हैं। इसलिए निगरानी की ज़रूरत महसूस की जा रही है। 2012 के निर्भया कांड के बाद जस्टिस उषा मेहरा आयोग ने भी सार्वजनिक जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की सिफारिश की थी।

सीएम मोहन यादव ने दिए आदेश
यह कानून बनाने की तैयारी 2020 से चल रही थी। तब शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री थे। उन्होंने ही गृह विभाग को इस पर काम शुरू करने को कहा था। ड्राफ्ट भी तैयार हो गया था, लेकिन कानून लागू नहीं हो सका। अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस काम में तेज़ी लाने को कहा है।

कमेटी के सुझावों से होंगे फैसले
इसके लिए चार स्तर की कमेटियां बनाई जाएंगी। सबसे ऊपर मॉनिटरिंग एंड कंट्रोल कमेटी होगी। फिर सुपरवाइजिंग कमेटी, इम्प्लीमेंटेशन कमेटी और सेक्टोरल कमेटी होगी। हर कमेटी के काम और अधिकार तय होंगे। सेक्टोरल कमेटी में स्थानीय दुकानदार और व्यापारी होंगे। इम्प्लीमेंटेशन कमेटी थाना स्तर पर होगी। सुपरवाइजिंग कमेटी औचक निरीक्षण करेगी और जुर्माना लगाएगी। मॉनिटरिंग एंड कंट्रोल कमेटी सबसे बड़ी कमेटी होगी। वही किसी प्रतिष्ठान को सील करने का आदेश देगी।

तेलंगाना मॉडल पर आधारित है कानून
यह कानून तेलंगाना मॉडल पर आधारित है। तेलंगाना में भी ऐसा ही कानून है। वहाँ सभी प्रतिष्ठानों में सीसीटीवी कैमरे लगाना ज़रूरी है। तेलंगाना में इस कानून के बाद अपराध कम हुए हैं। इसलिए मध्य प्रदेश ने भी तेलंगाना मॉडल अपनाया है। इसके अलावा मध्य प्रदेश में फायर सेफ्टी एक्ट भी लागू होने वाला है। इसके तहत फायर सेफ्टी टैक्स देना होगा। फायर पुलिस का भी गठन होगा।

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