Site icon World's first weekly chronicle of development news

11 साल के इंतजार के बाद शुरू होने जा रही फनिक्युलर ट्रेन

Funicular train going to start after 11 years of waiting
ब्लिट्ज ब्यूरो

कल्याण। नए साल में मलंगगड या हाजी मलंग पहाड़ी पर जाने वालों के लिए अच्छी खबर है। यहां जाने के लिए फनिक्युलर ट्रेन का काम चल रहा था, जो अब पूरा हो चुका है और इसी महीने में ट्रेन शुरू होने की उम्मीद है। पिछले 11 साल से मलंगगड पर फनिक्युलर ट्रेन का काम चल रहा है। इसका ट्रायल और सुरक्षा उपायों की जांच पूरी हो चुकी है। सूत्रों का कहना है कि लोक निर्माण विभाग 25 या 26 जनवरी को सेवा शुरू कर सकता है।

मलंगगड पहाड़ी पर हिंदू और मुस्लिम समुदायों के धार्मिक स्थल हैं, जहां देशभर से लोग दर्शन करने आते हैं। इसके अलावा, यह ठाणे, मुंबई और नवी मुंबई के प्रकृति प्रेमियों के बीच भी प्रसिद्ध है। अभी पहाड़ी तक पहुंचने के लिए लोगों को 2,600 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, जिसमें 2 घंटे से ज़्यादा लग जाता है। फनिक्युलर ट्रेन शुरू होने से 10 मिनट में पहाड़ पर पहुंचा जा सकेगा। वरिष्ठ नागरिकों, विकलांगों और बच्चों को इससे बड़ी राहत मिलेगी।

एक अधिकारी ने बताया कि एक समय में इस रूट पर दो फनिक्युलर (एक प्रकार का केबल रेलवे सिस्टम जो एक खड़ी ढलान पर बिछाई गई रेलवे पटरी के साथ बिंदुओं को जोड़ता है) चलेंगी, एक अप और एक डाउन। हर फनिक्युलर में 120 लोगों के बैठने की क्षमता है। यह दो-डिब्बे वाली ट्रेन होगी। ठाणे डिवीजन के एक वरिष्ठ पीडब्ल्यूडी अधिकारी ने कहा कि काम पूरा हो चुका है और सुरक्षा उपायों सहित सभी परीक्षण पूरे कर लिए गए हैं। हमने 25 जनवरी या 26 जनवरी को उद्घाटन करने की योजना बनाई है।

बता दें कि मलंगगड में सैकड़ों लोग रहते हैं, जो गेस्ट रूम, रेस्तरां चलाते हैं और आने वाले भक्तों को माला-फूल बेचते हैं। ऐसे में, यहां आने वाले भक्तों के अलावा इन लोगों को भी अपनी आजीविका के लिए सामान खरीदने के लिए शहर आने में होने वाली परेशानी भी कम होगी। मलंगगड में फूलों का कारोबार करने वाले फिरोज खान के मुताबिक, ‘मुझे यकीन है कि फनिक्युलर शुरू होने से यहां पर्यटन बढ़ेगा और जो लोग सीढ़ियां चढ़ने के डर से यहां नहीं आते हैं, वे भी आएंगे।’

एक नजर में प्रोजेक्ट
– फनिक्युलर को चलाने और रखरखाव के लिए करीब 70 कर्मचारी।
– 1.2 किलोमीटर लंबे दो-तरफ़ा ट्रैक के लिए मलंगगड पहाड़ी को काटा गया है।
– फरवरी 2013 में इसका शिलान्यास हुआ था और अक्टूबर 2013 में पीडब्ल्यूडी ने ठेकेदार से काम शुरू कराया।
– मार्च 2015 में ट्रेन शुरू होनी थी, लेकिन तकनीकी कारणों और दूसरी दिक्क तों से काम कई बार स्थगित हुआ।
– कुछ स्थानों पर पहाड़ी खड़ी होने की वजह से काम करने में मुश्किलें आईं।
– इससे काम की लागत 10.42 करोड़ रुपये से बढ़कर 93 करोड़ रुपये हो गई।

Exit mobile version