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जर्मनी की भारत केंद्रित नीतियों से रिश्तों में गर्माहट बढ़ी

Germany's India-centric policies increased the warmth in relations
ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। जर्मनी यूरोपीय संघ की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और भारत के सबसे महत्वपूर्ण साझीदारों में से एक है। 1951 में दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे। ये वर्ष 2000 में रणनीतिक भागीदारी में बदले। दोनों देशों की लोकतांत्रिक मूल्यों, नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और बहुपक्षवाद के साथ बहुपक्षीय संस्थानों के सुधारों को आगे बढ़ाने में समान रुचि है। दोनों पक्ष वैश्विक चुनौतियों से संयुक्त रूप से निपटने के लिए द्विपक्षीय सुरक्षा और रक्षा सहयोग भी बढ़ा रहे हैं।

स्कोल्ज की तीसरी भारत यात्रा
चांसलर स्कोल्ज की भारत की यह तीसरी यात्रा रही। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी लगातार मुलाकातें हो रही हैं। पिछले दो सालों में दोनों नेता करीब सात बार मिल चुके हैं। विशेषज्ञों के अनुसार जर्मनी और भारत मजबूत आर्थिक व विकास कार्यों में साझीदार हैं। जर्मनी यूरोपीय संघ में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार भी है। वर्ष 2023 में व्यापार में 5.84 फीसदी की वृद्धि के साथ 33.33 अरब डॉलर के उच्च स्तर को छू गया था। वर्ष 2000-2023 के बीच जर्मनी ने भारत में 14.5 अरब डॉलर का निवेश किया। इंडो-जर्मन चैंबर आफ कामर्स के अनुसार दो हजार से अधिक जर्मन कंपनियां भारत में सक्रिय हैं।

जर्मनी ने दो भारत केंद्रित दस्तावेज जारी किए:
दोनों देशों के बीच गहराते रिश्तों का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हाल में जर्मनी की सरकार ने दो भारत केंद्रित दस्तावेज जारी किए। फोकस इन इंडिया नामक दस्तावेज पहली ऐसी रणनीति है जो जर्मनी की सरकार ने भारत पर घोषित की है। यह सभी मंत्रालयों और विभागों की सहमति से भारत के साथ संबंध मजबूत करने की संघीय सरकार की इच्छा को बताती है। जर्मनी ने हाल में भारत पर केंद्रित एक कुशल श्रम नीति भी घोषित की है। इसका उद्देश्य जर्मनी में कार्यबल की गंभीर कमी को दूर करने के लिए भारत से जर्मनी तक कुशल कार्यबल की गतिशीलता में सुधार करना है। यह किसी देश पर आधारित उसकी पहली विशिष्ट रणनीति है।

क्या है आईजीसी तंत्र
यह द्विवार्षिक प्रारूप 2011 में लॉन्च किया गया। यह कैबिनेट स्तर पर सहयोग की व्यापक समीक्षा और जुड़ाव के नए क्षेत्रों की पहचान की अनुमति देता है। भारत उन चुनिंदा देशों के समूह में से एक है जिनके साथ जर्मनी का ऐसा तंत्र है।

भारतीय छात्रों-शोधार्थियों के लिए महत्व
जर्मनी भारतीय छात्रों और शोधार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण देश है। इस साल भारत आइंस्टीन के देश के साथ विज्ञान और प्रौद्यौगिकी सहयोग के 50 साल पूरे होने का जश्न भी मना रहा है। दोनों देशों ने अंतरिक्ष अनुसंधान, एआई, स्थिरता, पृथ्वी और पर्यावरण विज्ञान और उन्नत सामग्री जैसे वैश्विक और उभरते महत्व के कई क्षेत्रों में परियोजनाएं शुरू की हैं।

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