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सोना-चांदी के बाजार में भूचाल, सावधान रहें निवेशक

Gold
ब्लिट्ज ब्यूरो

मुंबई। इधर कुछ दिनों से सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट आई है। डॉलर के मुकाबले सोने के दाम 19% तक फिसल गए हैं। चांदी भी अपने उच्चतम स्तर से 40% तक टूट गई है। वहीं, साल 2026 में भारतीय शेयर बाजार, यानी सेंसेक्स और निफ्टी करीब 5% गिर चुके हैं। शेयर बाजारों में बिक्री का कारण विदेशी निवेशकों की बिकवाली और भू-राजनीतिक तनाव बताया जाता है।
कुछ दिन से मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर तो भूचाल जैसी स्थिति है। सोने के अप्रैल वायदा 6% गिरकर 1,38,888 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गए। चांदी तो 12% के लोअर सर्किट पर पहुंच गई। एक ही सत्र में चांदी करीब 40,000 रुपये प्रति किलोग्राम का नुकसान झेल गई है। बीते गुरुवार को चांदी चार लाख रुपये किलो के रिकॉर्ड स्तर पर चली गई थी। वह घट कर 2.25 लाख रुपये पर आ गई थी। कीमती धातुओं में इतनी तेजी से मुनाफावसूली हुई कि जिन संपत्तियों को ऐसे मुश्किल समय में पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखने के लिए खरीदा गया था, उनके बारे में लोगों को फिर से सोचना पड़ रहा है।
बाजार में इस गिरावट की शुरुआत पिछले शुक्रवार को ही हुई है। तब बाजारों में यह खबर आई कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल की जगह लेने के लिए पूर्व फेड गवर्नर केविन वॉर्श को अपनी पहली पसंद बताया है। वॉर्श को महंगाई के प्रति सख्त और मजबूत अमेरिकी डॉलर का समर्थक माना जाता है। उनकी इस नियुक्ति की खबर ने कमोडिटी बाजारों में मानों हड़कंप मचा दिया। हालांकि पॉवेल का कार्यकाल आगामी 15 मई को खत्म होगा। यही नहीं, वार्श की नियुक्ति को अभी सीनेट की मंजूरी बाकी है लेकिन बाजारों ने तुरंत ही सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों को आत्मसात कर लिया। इससे सुरक्षित मानी जाने वाली संपत्तियों में तेज गिरावट आई और सोना-चांदी जैसी कीमती धातुओं की मांग काफी कमजोर हो गई।
इनसे भी मिली हवा
सोने-चांदी के साथ शेयर बाजार में आई इस गिरावट को अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से, ट्रेजरी यील्ड (सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला ब्याज) बढ़ने से और अमेरिका से आए महंगाई के अच्छे आंकड़ों (पीपीआई और कोर पीपीआई ) से भी हवा मिली। इधर भारत के केंद्रीय बजट में आयात शुल्क में कोई बदलाव न होने से घरेलू बाजार में सोने की प्रीमियम (कीमत में अतिरिक्त बढ़ोतरी) खत्म हो गई, जिससे स्थानीय कीमतों को मिलने वाला एक अहम सहारा भी हट गया। आग में घी का काम किया सीएमई ( शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज) के मार्जिन में बढ़ोतरी ने। एक्सचेंज के बयान के अनुसार, गैर-बढ़े हुए जोखिम प्रोफाइल के लिए सोने के मार्जिन 6% से बढ़कर 8% हो गए, और बढ़े हुए जोखिम प्रोफाइल के लिए 6.6% से बढ़कर 8.8% हो गए। चांदी के मार्जिन गैर-बढ़े हुए जोखिम प्रोफाइल के लिए 11% से बढ़कर 15% हो गए, और बढ़े हुए जोखिम प्रोफाइल के लिए 12.1% से बढ़कर 16.5% हो गए। इससे लीवरेज्ड (उधार लेकर निवेश करने वाले) ट्रेडर्स को अपनी पोजीशन बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा।

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