ब्लिट्ज ब्यूरो
वॉशिंगटन। वेनेजुएला से निकले एक तेल टैंकर को पिछले सप्ताह अमेरिकी कोस्ट कार्ड ने जब्त कर लिया था। इस घटना के बाद रूस और अमेरिका के बीच तनाव है। वहीं, ताजा जानकारी के मुताबित, इस तेल टैंकर जहाज में कुल 28 क्रू मेंबर्स सवार थे, जिनमें तीन भारतीय, 20 यूक्रेनी, 2 रूसी और छह जॉर्जियाई हैं। इनमें से दोनों रूसी क्रू मेंबर्स को रिहा कर दिया गया है, जबकि बाकी क्रू मेंबर्स अभी भी अमेरिका की हिरासत में हैं। अब पता चला है कि तीन भारतीयों में एक का नाम रिक्षित चौहान है, जो हिमाचल प्रदेश के रहने वाले हैं।
टैंकर, जिसका नाम पहले बेला 1 था, रूसी झंडे के नीचे चल रहा था और इसे एक प्राइवेट ट्रेडर ने किराए पर लिया था। बताया जा रहा है कि इसमें वेनेजुएला से जुड़ा कच्चा तेल था और यह रूस जा रहा था, तभी इसे रोक लिया गया। मीडिया की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि रिक्षित का परिवार पालमपुर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के तहत पालमपुर के बाहरी इलाके में रहता है। परिवार अपने बेटे से अचानक संपर्क टूटने से परेशान और दुखी है। रिक्षित के पिता रणजीत सिंह ने बताया है कि उन्होंने पांच दिन पहले फोन पर अपने बेटे से बात की थी। उन्होंने आंखों में आंसू लिए कहा, हमें किसी भी आधिकारिक सोर्स से कोई जानकारी नहीं मिली है। न तो भारत सरकार और न ही रूसी अधिकारियों ने अब तक हमसे संपर्क किया है। उन्होंने कहा है कि हमारा पूरा परिवार उसकी सुरक्षा और सेहत को लेकर बहुत चिंतित है।
हिरासत से भारतीयों की वापसी कब?
रिक्षित के परिवार ने बताया है कि रिक्षित पिछले साल अगस्त में मर्चेंट नेवी में शामिल हुआ था, और यह समुद्र में उसका पहला असाइनमेंट था। परिवार को उसके नए करियर पर गर्व था, लेकिन अब डर और अनिश्चितता ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

