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आईआईटी इंदौर कर रही और बेहतर सिस्टम सी-वी2एक्स पर काम

IIT Indore is working on a better C-V2X system
ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। सड़क हादसों को कम करने, ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने और भविष्य की स्मार्ट मोबिलिटी की तैयारी के लिए आईआईटी इंदौर में अहम शोध किया जा रहा है। इलेक्टि्रक इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर प्रभात कुमार उपाध्याय के नेतृत्व में शोधकर्ताओं की टीम ने सेलुलर व्हीकल-टू-एवरीथिंग (सी-वी2एक्स) तकनीक पर आधारित एडवांस्ड इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम विकसित किया है जो वी2वी तकनीक से भी आगे का है। यह तकनीक वाहनों को न सिर्फ एक दूसरे से बल्कि सड़क के इंफ्रास्ट्रक्चर, पैदल यात्रियों और क्लाउड सिस्टम से भी सीधे संवाद करने में सक्षम बनाती है।
संभावित खतरों से करेंगे अलर्ट
तकनीक का मुख्य उद्देश्य सड़क सुरक्षा बढ़ाना, ट्रैफिक जाम कम करना और यात्रा को ज्यादा सुरक्षित व सुगम बनाना है। सी-वी2एक्स के जरिए वाहन रियल टाइम में एक-दूसरे को संभावित खतरों की जानकारी दे सकते हैं जैसे आगे दुर्घटना होना, अचानक ब्रेक लगना, खराब सड़क की स्थिति या ट्रैफिक जाम। खास बात यह है कि यह जानकारी कई बार ड्राइवर के खतरा देखने से पहले ही मिल जाती है। हाई-स्पीड नेटवर्क के कारण ये संदेश बेहद कम समय में पहुंचते हैं जिससे समय रहते सही फैसला लिया जा सकता है।
सीमित वायरलेस नेटवर्क को बांटना थी चुनौती
शोध के दौरान टीम के सामने बड़ी चुनौती यह थी कि सीमित वायरलेस नेटवर्क को आम मोबाइल यूजर्स और वाहनों के बीच कैसे बेहतर तरीके से बांटा जाए।
समाधान के लिए टीम ने इंटेलिजेंट रिसोर्स एलोकेशन एल्गोरिदम विकसित किए हैं जो ट्रैफिक की स्थिति, नेटवर्क और सिग्नल क्वालिटी के अनुसार कम्युनिकेशन संसाधनों को खुद ही तय करते हैं। इससे सुरक्षा से जुड़े संदेशों का आदान-प्रदान बिना देरी से हो पाता है।
तकनीक का कड़ा परीक्षण
रिसर्च में वास्तविक ट्रैफिक मॉडल और सिमुलेशन के जरिए तकनीकों का कड़ा परीक्षण किया गया है ताकि असली परिस्थितियों में भी सिस्टम प्रभावी रहे। प्रो प्रभात उपाध्याय के अनुसार शोध का लक्ष्य वाहनों और सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर के बीच भरोसेमंद और तेज संवाद स्थापित करना है।
सड़कों की दिशा में मजबूत कदम
सड़क सुरक्षा, सस्टेनेबिलिटी और मोबिलिटी आज की सबसे बड़ी जरूरत है। कनेक्टेड और इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम स्मार्ट शहरों और सुरक्षित सड़कों की दिशा में मजबूत कदम हैं। यह शोध आधुनिक संचार तकनीक से लोगों की जान बचाने और ट्रैफिक कम करने में मदद कर सकता है।
– प्रो. सुहास जोशी, निदेशक, आईआईटी इंदौर

सी-वी2एक्स और वी2वी में है बड़ा अंतर
वी2वी (वाहन-से-वाहन) सिर्फ़ गाड़ियों के आपस में बात करने (स्पीड, लोकेशन) पर फ़ोकस करता है जबकि सी-वी2एक्स (सेलुलर व्हीकल-टू-एवरीथिंग) एक बड़ा सिस्टम है जो वी2वी के साथ-साथ गाड़ी का इंफ्रास्ट्रक्चर (ट्रैफिक लाइट), पैदल यात्री, और नेटवर्क (क्लाउड) से भी बात कराता है जिसमें 4जी/5जी सेलुलर तकनीक का इस्तेमाल होता है जिससे ज़्यादा बेहतर और व्यापक जानकारी मिलती है। वी2वी गाड़ियों के बीच सीधा कनेक्शन है, पर सी-वी2एक्स इस कनेक्शन को 5जी की मदद से बहुत आगे ले जाता है, जो स्वायत्त (ऑटोनॉमस) ड्राइविंग के लिए ज़रूरी है।

वी2वी (वाहन-से-वाहन)
फोकस : केवल गाड़ियों के बीच सीधे संचार (कम्यूनिकेशन) पर केंद्रित है।
काम : एक गाड़ी दूसरी गाड़ी को अपनी स्पीड, लोकेशन, और दिशा के बारे में बताती है जिससे टक्क र से बचने और खतरों की जानकारी मिलती है।
टेक्नोलॉजी : यह डीएसआरसी (डेडिकेटेड शॉर्ट-रेंज कम्युनिकेशन) जैसी वायरलेस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करता है।
दायरा : सीमित, सिर्फ़ आसपास की गाड़ियों तक।

सी-वी2एक्स (सेलुलर व्हीकल-टू-एवरीथिंग)
फोकस : ‘सभी’ (कम्युनिकेशन विद एवरीथिंग) से संचार, वी2वी इसका एक हिस्सा है।
काम : वी2वी: गाड़ियों से बात (ऊपर देखें)।
वी2आई (इन्फ्रास्ट्रक्चर): ट्रैफिक लाइट, सड़क के सेंसर से बात।
वी2पी (पेडेस्टि्रयन): पैदल चलने वालों और साइकिल सवारों से बात (मोबाइल एप के ज़रिए)।
वी2एन (नेटवर्क/क्लॉउड): 5जी/4जी नेटवर्क और क्लाउड से बात (मौसम, नेविगेशन अपडेट, ओटीए अपडेट)।
टेक्नोलॉजी : 4जी एलटीई और 5जी जैसी सेलुलर तकनीकों का उपयोग करता है।
दायरा : बहुत व्यापक क्योंकि यह सेलुलर नेटवर्क का फायदा उठाता है जो दूर तक जानकारी भेज सकता है।

मुख्य अंतर
वी2वी एक कम दायरे का (नैरो) संचार है, जबकि सी-वी2एक्स एक व्यापक (ब्रॉड) संचार प्रणाली है जो वी2वी को समाहित (इनकॉरपोरेट) करता है।
वी2वी गाड़ियों के बीच की सुरक्षा पर है जबकि सी-वी2एक्स गाड़ियों को पूरे डिजिटल इकोसिस्टम से जोड़ता है जो स्वायत्त ड्राइविंग (ऑटोनॉमस ड्राइविंग) के लिए ज़्यादा जरूरी है।

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