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भारत ने अमेरिका को दिया खनिज साझेदारी समझौते का प्रस्ताव

India proposed mineral sharing agreement to America
ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। भारत ने अमेरिका को महत्वपूर्ण खनिज साझेदारी समझौते का प्रस्ताव दिया है। इससे भारत की इलेक्टि्रक वाहन कंपनियों को अमेरिकी बाजार में बड़ा लाभ मिलेगा। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि हाल ही अमेरिका यात्रा के दौरान मैंने भारत की ओर से यह मुद्दा उठाया। हालांकि इस दौरान भारत-अमेरिका के बीच खनिज आपूर्ति बढ़ाने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मैंने महत्वपूर्ण खनिज एमओयू को साझेदारी समझौते में बदलने का सुझाव दिया है। यह मुक्त व्यापार समझौते की दिशा अहम पहल होगी। हालांकि अमेरिका अभी किसी भी देश के साथ मुक्त व्यापार समझौते के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले साल अमेरिका और जापान ने खनिज समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। अगर भारत और अमेरिका के बीच खनिज साझेदारी हो जाती है तो भारतीय कंपनियों को अमेरिकी बाजार में काफी मदद मिलेगी। अगर खनिज एमओयू साझेदारी समझौते में बदल जाता है तो इसे व्यापार सौदे का दर्जा मिल जाएगा। इससे भारत को इलेक्टि्रक वाहन टैक्स क्रेडिट का लाभ मिलेगा।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अमेरिका यात्रा के दौरान कुछ अमेरिकी कंपनियों ने भारत में विभिन्न क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने में गहरी दिलचस्पी दिखाई। इसमें एक कंपनी एआई के लिए डाटा सेंटर और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में 10 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश पर विचार कर रही है। इसके अलावा तकनीकी के हस्तांतरण को लेकर भी चर्चा हुई।

उन्होंने कहा कि इसके अलावा फार्मा, डिजिटल प्रौद्योगिकी और दूरसंचार जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने को लेकर बात हुई। इसके अलावा अमेरिकी कंपनियां बायोसिमिलर और बायो-साइंस जैसे क्षेत्रों में भी निवेश को उत्सुक हैं। यात्रा के दौरान केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिकी वाणिज्य सचिव जीना रायमोंडो के साथ यूएस-भारत सीईओ फोरम की बैठक की सह-अध्यक्षता भी की। इसमें व्यापार कानूनों को अपराधमुक्त करने, पूंजी के प्रवाह को सुविधाजनक बनाने, नियामकों को एक-दूसरे से अधिक बार बात करने समेत कई समझौतों को लेकर चर्चा की गई। फोरम का कार्यकाल दिसंबर में खत्म हो जाएगा।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एच1बी वीजा अब गुजरे जमाने की बात हो गई है। मैनें कंपनियों को भारत में वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया है। इसके अलावा भारत न्यूयॉर्क और सिलिकॉन वैली में निवेश कार्यालय खोलने पर विचार कर रहा है। इसमें इन्वेस्ट इंडिया और नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनआईसीडीसी) के प्रतिनिधि होंगे और भारत में निवेश में सहायता करेंगे। यात्रा के दौरान स्वच्छ ऊर्जा पर हरित हाइड्रोजन पर भी चर्चा की गई।

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