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गुजरात के 6 आयुर्वेद कॉलेजों के खिलाफ जांच का आदेश

Inquiry ordered against 6 Ayurveda colleges in Gujarat
ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में गुजरात हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार किया, जिसने उन स्टूडेंट्स को राहत देने से मना किया, जिन्हें गुजरात के कॉलेजों ने बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (बीएएमएस) और बैचलर ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी (बीएचएमएस) कोर्स में कंडीशनल एडमिशन दिया था। जो स्टूडेंट्स नीट्स-यूजी 2019-20 में शामिल हुए, उन्होंने 2018 के संशोधित आयुष नियमों द्वारा तय न्यूनतम नीट पर्सेंटाइल क्वालिफाई नहीं किया, लेकिन कॉलेजों ने उन्हें इस उम्मीद में कंडीशनल एडमिशन दे दिया कि केंद्र सरकार बाद में कट-ऑफ कम कर सकती है, जैसा कि पहले कुछ मामलों में हुआ था। नियमों के अनुसार, बीएएमएस/बीपीएमएस कोर्स में एडमिशन पाने के लिए अनारक्षित कैटेगरी में न्यूनतम कट-ऑफ पर्सेंटाइल 50% है।
यह मामला सबसे पहले सिंगल जज के पास गया, जिन्होंने कहा कि स्टूडेंट्स का एडमिशन बरकरार नहीं रखा जा सकता, क्योंकि उन्होंने संशोधित आयुष नियमों को चुनौती नहीं दी थी। जज ने यह भी कहा कि कंडीशनल एडमिशन में साफ तौर पर लिखा कि एडमिशन कट-ऑफ मार्क्स में कमी के लिए आयुष की मंजूरी पर निर्भर है। इसे कोर्ट के अंदर अपील के जरिए चुनौती दी गई, जिसमें तर्क दिया गया कि सिंगल जज ने यूनियन ऑफ इंडिया बनाम फेडरेशन ऑफ सेल्फ-फाइनेंस्ड आयुर्वेदिक कॉलेज, पंजाब और अन्य (2020) मामले पर विचार नहीं किया, जिसमें ऐसी ही स्थिति पैदा हुई।

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