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कोटा को नए साल का ‘महा उपहार’

Kota gets a 'great gift' for the New Year
ब्लिट्ज ब्यूरो

कोटा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने चंबल के किनारे बसे 1 लाख से ज्यादा लोगों को नए साल का तोहफा दिया है। हैंगिंग ब्रिज से कोटा बैराज के बीच बसे 40 हजार से ज्यादा घर अब चंबल घड़ियाल अभयारण्य की सीमा से मुक्त हो गए। सालों से विकास के लिए तरस रहे इस इलाके में अब न सिर्फ घर-दुकानों के पट्टे बनाए जा सकेंगे बल्कि निर्माण कार्य में लगे प्रतिबंध भी हट जाएंगे।

1972 में हुआ था आबादी प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित
चंबल में बसे घड़ियालों को विलुप्त होने से बचाने के लिए जवाहर सागर बांध से लेकर कोटा बैराज तक के इलाके को घड़ियाल अभयारण्य घोषित कर दिया गया था। घड़ियालों का संरक्षण करने के लिए वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत नदी के किनारे से एक किमी तक के इलाके को आबादी प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित कर दिया गया था। इसका नतीजा यह हुआ कि गुमानपुरा से लेकर सकतपुरा, शिवपुरा, नयागांव और किशोरपुरा इलाके के तमाम हिस्से अभ्यारण्य की सीमा में आ गए।

जमीनों के पट्टों तक पर प्रतिबंध
स्पीकर बिरला घड़ियाल सेंचुरी की सीमा में रह रहे दो लाख से ज्यादा लोगों की इस परेशानी से मुक्त करने के लिए प्रयासरत थे। घड़ियाल सेंचुरी घोषित होने के कारण चंबल के दोनों किनारों पर बसे लोगों की जमीनों के पट्टों तक पर प्रतिबंध लगा दिया गया। जिसके चलते जमीनें बेचना खरीदना ही नहीं नए भवन का निर्माण और पुरानों का जीर्णोद्धार तक असंभव हो गया।

एनबीडब्लूएल ने पहले किया डि-नोटिफाई
स्पीकर बिरला के प्रयासों से सबसे पहले नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्ड लाइफ (एनबीडब्लूएल) से हैंगिंग ब्रिज से लेकर कोटा बैराज तक के इलाका डिनोटिफाई हुआ। केंद्र सरकार की ओर से सारी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद आखिर में राजस्थान सरकार ने भी इस क्षेत्र को घड़ियाल सेंचुरी से मुक्त करने का आदेश जारी कर दिया। 23 दिसंबर, 2025 को राज्यपाल ने भी इस प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी। जिसके बाद आज इसकी बकायदा अधिसूचना भी जारी कर दी गई।

ये क्षेत्र हुए घड़ियाल सेंचुरी से मुक्त
हैंगिंग ब्रिज से लेकर कोटा बैराज तक का 732 हेक्टेयर का क्षेत्र राष्ट्रीय घड़ियाल अभ्यारण्य क्षेत्र से मुक्त हो गया है। करीब 206 खसरों पर लगा प्रतिबंध अब हट जाएगा जिसके बाद किशोरपुरा का 208.56 हेक्टेयर, शिवपुरा का 320.33 हेक्टेयर, सकतपुरा का 186.36 हेक्टेयर, रामपुरा का 0.7, गुमानपुरा का 3.93 और नयागांव का 12.12 हेक्टेयर एरिया सेंचुरी से बाहर हो जाएगा। इससे लोगों को घरों से पट्टे जारी हो सकेंगे और निर्माण कार्य पर लगे प्रतिबंध भी हट जाएंगे। लंबे समय से लोगों की मांग थी कि उन्हें इस समस्या से निजात मिले। इसके लिए लगातार प्रयासरत थे। खुशी है कि बड़ी आबादी वाला यह क्षेत्र भी विकास के मामले में कोटा के बाकी हिस्सों के साथ कदमताल कर सकेगा।

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