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आसमान में मोदी-योगी, लखनऊ में उड़ी सियासी व खेल सितारों की पतंग

Modi-Yogi in the sky, kites of political and sports stars flew in Lucknow
ब्लिट्ज ब्यूरो

लखनऊ । राजधानी में पतंगबाजी का महापर्व ‘जमघट’ पूरे जोश के साथ मनाया गया, जिसमें हर तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, और क्रिकेट सितारों विराट कोहली एवं रोहित शर्मा की तस्वीरों वाली पतंगें लहराती हुई नजर आई ं। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने खुद तीन पतंग उड़ाकर इस आयोजन में जोश भर दिया। इस परंपरा में हर वर्ष की तरह इस बार भी नवाबी दौर का रोमांच दिखा।
पतंगों पर पॉलिटिकल स्लोगन और पर्यावरण बचाने के संदेशों ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। लखनऊ के ऐतिहासिक चौक, हुसैनगंज, अमीनाबाद, मौलवी गंज, वजीरगंज, चौक, नक्खास, चौपटिया, और ठाकुर गंज इलाकों में पतंगबाजी का यह त्योहार धूमधाम से मनाया गया।
इस वर्ष पतंगों के साथ राजनीतिक और सामाजिक संदेश जुड़े थे, जिससे यह पतंगबाजी प्रतियोगिता और भी खास बन गई । 250 साल पुराने पतंगबाजी के इतिहास को जिंदा रखते हुए, आज भी नवाबों के शहर लखनऊ में पतंगबाजी के इस पर्व ने नई पीढ़ी में उत्साह का संचार किया।

जमघट के दिन अवध में पतंगबाजी का इतिहास
अवध क्षेत्र में ‘जमघट’ के दिन पतंगबाजी का एक गहरा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व है। इस दिन को मकर संक्रांति के अवसर पर मनाया जाता है, जो उत्तर भारत में एक प्रमुख त्यौहार है। मकर संक्रांति को सूर्य देवता के मकर राशि में प्रवेश करने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जो सर्दियों के अंत और वसंत के आगमन का प्रतीक है।

अवध में, खासकर लखनऊ में, पतंगबाजी एक परंपरागत खेल के रूप में इस दिन की शोभा बढ़ाती है। इस दिन आसमान में रंग-बिरंगी पतंगों की बहार होती है, और हर आयु वर्ग के लोग इस उत्सव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। पतंगबाजी का यह चलन सदियों पुराना है और इसे नवाबों के समय से जोड़ा जाता है। उस काल में नवाब पतंगबाजी को एक मनोरंजन और समाजीकरण का साधन मानते थे, जहां आमजन और रईस वर्ग एक ही मैदान में एकसाथ आते थे। पतंगबाजी का एक प्रतीकात्मक पहलू भी है, जिसमें पतंगों के माध्यम से लोग अपने दुखों को छोड़कर नई ऊँचाइयों तक पहुंचने का संकेत देते हैं।

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