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मुइज्जू ने चीनी कंपनी से छीन भारत को सौंपा बड़ा प्रोजेक्ट

PM stresses Maldives
ब्लिट्ज ब्यूरो

माले। पिछले दिनों भारत यात्रा पर आए मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने एक बड़ा फैसला किया है। उन्होंने मालदीव में चीनी कंपनी से लामू गाधू ट्रांसशिपमेंट पोर्ट प्रोजेक्ट छीनकर उसे भारत को सौंपा है। इस प्रोजेक्ट को पहले जिस चीनी कंपनी को पूरा करना था, लेकिन उसने कोई भी जमीनी काम को अंजाम नहीं दिया था। लामू गाधू ट्रांसशिपमेंट पोर्ट प्रोजेक्ट को भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। मालदीव के सरकारी बयान में कहा गया है कि लामू गाधू ट्रांसशिपमेंट पोर्ट प्रोजेक्ट को भारत के साथ मिलकर पूरा करने का फैसला किया गया है।

11 अप्रैल को मालदीव ने चीन को दिया था कॉन्ट्रैक्ट
रिपोर्ट के अनुसार, मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की भारत यात्रा के दौरान गाधू और इहावंधिपोल्हू में ट्रांसशिपमेंट पोर्ट में एक साथ काम करने पर सहमति बनी है। गाधू में एक एकीकृत समुद्री केंद्र स्थापित करने के लिए 11 अप्रैल को चीन की कैमसी कंपनी लिमिटेड के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे। सैटेलाइट इमेज से पुष्टि होती है कि गाधू में परियोजना के तहत कोई व्यावहारिक काम नहीं किया गया है।

मुइज्जू ने चीन को छोड़ भारत को क्यों चुना?
मालदीव की मीडिया अधाधु की रिपोर्ट के अनुसार, इस परियोजना में शामिल चीनी कंपनी को प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बैंकों ने ब्लैकलिस्ट कर दिया है। मालदीव की तरफ से मालदीव पोर्ट लिमिटेड (एमपीएल) ने कैमसी के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। मालदीव की सरकार ने यह नहीं बताया कि कैमसी के साथ समझौता रद किया गया था या नहीं। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार भारत के साथ मिलकर इस परियोजना को कैसे आगे बढ़ाने की योजना बना रही है।

प्रोजेक्ट में क्या-क्या है शामिल

मालदीव ने अप्रैल में घोषणा की थी कि वह गाधू एकीकृत समुद्री केंद्र में एक ट्रांसशिपमेंट बंदरगाह, एक क्रूज टर्मिनल, एक नौका मरीना और एक इको-रिसॉर्ट विकसित करेगी। मालदीव औद्योगिक विकास मुक्त क्षेत्र को इहावनधिप्पोल्हु क्षेत्र को एक विशेष आर्थिक क्षेत्र और मालदीव आर्थिक प्रवेशद्वार के रूप में विकसित करने का काम सौंपा गया है। परियोजना अभी तक किसी भी कंपनी को नहीं दी गई है।

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