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पीएमएलए कितना भी सख्त हो, बीमारों व अशक्तों को जमानत मिलनी चाहिए

No matter how strict PMLA is, the sick and disabled should get bail.
ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने धन शोधन के अपराध के आरोपी सेवा विकास सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष अमर साधुराम मूलचंदानी को अंतरिम जमानत दी।

पीठ ने राहत देने से पहले जेजे ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स द्वारा विशेषज्ञों की 4 सदस्यीय समिति द्वारा प्रस्तुत मेडिकल रिपोर्टों का अवलोकन किया।
सीनियर एडवोकेट आत्माराम नादकर्णी ने यह कहते हुए जमानत देने का विरोध किया कि आरोपी पर सबूतों से छेड़छाड़ करने के लिए अन्य एफआईआर भी दर्ज हैं तो सीजेआई ने कहा, नादकर्णी जी,पीएमएलए कितना भी सख्त क्यों न हो, हमें कानून के दायरे में काम करना होगा। कानून हमें बताता है कि जो व्यक्ति बीमार और अशक्त है, उसे जमानत दी जानी चाहिए। यह कहना कि उसका सरकारी अस्पताल में इलाज हो सकता है। कानून के अनुसार नहीं है। संदर्भ के लिए पीएमएलए की धारा 45 के प्रावधान में कहा गया कि जो आरोपी बीमार या अशक्त है, उसे जमानत देने के लिए निर्दिष्ट दोहरी शर्तों के बावजूद जमानत दी जा सकती है। याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने कहा कि मुलचंदानी क्रोनिक किडनी रोग से पीड़ित है। जेल में रहने के दौरान वह दैनिक गतिविधियां नहीं कर सकता। नादकर्णी ने सुझाव दिया कि उसे हिरासत में लेकर पास के अस्पताल में भर्ती कराया जा सकता है।

जवाब में रोहतगी ने जोर देकर कहा कि आरोपी की उम्र 67 साल है, वह 1 साल और 3 महीने से जेल में है और उसका नाम किसी भी तरह के अपराध में नहीं है।

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