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तिब्बती चिल्ड्रेन विलेज में इस साल नहीं आया कोई नया छात्र

No new students came to Tibetan Children Village this year
ब्लिट्ज ब्यूरो

र्मशाला। तिब्बती बच्चों के गांव (तिब्बती चिल्ड्रेन विलेज) में इस साल एक भी नया छात्र नहीं आया है। ऐसा पहली बार हुआ है। तिब्बती चिल्ड्रेन विलेज के डायरेक्टर त्सूल्ट्रिम दोरजी ने बताया कि चीन के अत्याचार की वजह से ऐसा हुआ है। 2008 से पहले हर साल 700 से 800 तिब्बती छात्र यहां पढ़ने आते थे। पिछले साल सिर्फ 6 छात्र आए थे और इस साल एक भी नहीं।

तिब्बती चिल्ड्रेन विलेज हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में है और इसे भारत में तिब्बती स्कूलों की ‘मां’ माना जाता है। यहां सबसे ज़्यादा तिब्बती बच्चे पढ़ते हैं। पहले यहां 12,000 से ज़्यादा बच्चे पढ़ते थे। अभी केजी से लेकर 12वीं कक्षा तक के लगभग 6,000 छात्र हैं। तिब्बती चिल्ड्रेन विलेज का मकसद है कि हर तिब्बती बच्चे को अच्छी शिक्षा मिले, अपनी संस्कृति की पहचान मिले और वो आत्मनिर्भर बनें।

चीन भारत आने से रोक रहा
दोरजी ने बताया कि चीन तिब्बतियों को भारत आने से रोकने के लिए जोर-जबरदस्ती कर रहा है। उनके मुताबिक, चीन शहरों और दूर-दराज के गांवों से तिब्बती बच्चों को उठाकर ले जा रहा है और उन्हें ‘औपनिवेशिक स्कूलों’ में डाल रहा है। चीन ने ये स्कूल तिब्बत में बनाये हैं। वहां बच्चों को जबरदस्ती चीनी भाषा, संस्कृति और परंपराएं सिखाई जा रही हैं।

‘तिब्बती बच्चों की पहचान मिटाने की कोशिश’
दोरजी ने कहा कि चीन की इस चाल से तिब्बती बच्चों की पहचान मिटाने की कोशिश की जा रही है। जब उन्हें सिर्फ चीनी शिक्षा मिलेगी तो उनके मन में तिब्बत के प्रति नफरत पैदा होगी। उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि चीन ने तिब्बतियों पर नज़र रखने के लिए सैन्य शिविर बनाये हैं। तिब्बत-नेपाल सीमा पर भी चौकियां बनाई गई हैं ताकि कोई भी तिब्बती भारत में न आ सके।

‘इस समस्या को दुनिया के सामने लाना होगा’
त्सूल्ट्रिम दोरजी ने कहा कि हमें तिब्बतियों की इस समस्या को दुनिया के सामने लाना होगा। इसके लिए सीटीए और आम लोगों को मिलकर काम करना होगा। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय पर दबाव बनाना होगा ताकि चीन तिब्बतियों को भारत आने दे।

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