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आरक्षित वर्ग के लिए अब ‘जीरो’ पर्सेंटाइल पर दाखिला

Top court rejects plea against NEET-UG answer key, results
ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंसेज (एनबीईएमएस) ने नीट-पीजी 2025 काउंसलिंग के लिए न्यूनतम योग्यता वाले पर्सेंटाइल को कम कर दिया है। मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, आरक्षित श्रेणियों के लिए इसे घटाकर ‘शून्य पर्सेंटाइल’ कर दिया गया है।
इसे और सरल तरीके से ऐसे समझें : पहले काउंसलिंग में बैठने के लिए एक तय स्कोर (पर्सेंटाइल) लाना जरूरी होता था, लेकिन अब आरक्षित वर्ग के उन सभी डॉक्टरों को भी मौका मिलेगा जिन्होंने परीक्षा दी है, चाहे उनका स्कोर कुछ भी रहा हो।
यह कदम देश भर के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में काउंसलिंग के दूसरे दौर के पूरा होने के बाद बड़ी संख्या में खाली रह गई सीटों (18,000 से अधिक पीजी सीटों) की समस्या को हल करने के लिए उठाया गया है। इससे पहले तय की गई पर्सेंटाइल की सीमा के कारण, सीटें उपलब्ध होने के बावजूद पात्र उम्मीदवारों की संख्या सीमित हो गई थी।
भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) ने 12 जनवरी को सीटों की बर्बादी रोकने और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता का हवाला देते हुए योग्यता कट-ऑफ में संशोधन का औपचारिक अनुरोध किया था। सूत्रों ने कहा, इस संशोधन का उद्देश्य उपलब्ध सीटों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है, जो भारत में प्रशिक्षित चिकित्सा विशेषज्ञों की संख्या बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण हैं। इन सीटों को खाली छोड़ने से स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के राष्ट्रीय प्रयासों को नुकसान पहुंचता है और मूल्यवान शैक्षिक संसाधनों का भी नुकसान होता है।
नीट पीजी केंद्रीकृत काउंसलिंग के माध्यम से सीटों के पारदर्शी और योग्यता-आधारित आवंटन की सुविधा के लिए एक रैंकिंग तंत्र के रूप में कार्य करता है। एनबीईएमएस के अनुसार, हालांकि योग्यता कट-ऑफ को कम कर दिया गया है, लेकिन नीट-पीजी 2025 की रैंक पहले की तरह ही बनी रहेगी। बोर्ड ने अपने आधिकारिक नोटिस में कहा, पात्रता प्रोविजनल है और प्रवेश के समय एमबीबीएस/एफएमजीई के कुल अंकों, फेस आईडी या बायोमेट्रिक जांच के माध्यम से इसकी पुष्टि की जाएगी।
बोर्ड ने यह चेतावनी भी दी है कि आवेदन में दी गई गलत या झूठी जानकारी, विशेष रूप से यदि इसका उपयोग टाई-ब्रेकिंग (समान अंक होने पर फैसला) के लिए किया गया हो तो उम्मीदवारी रद कर दी जाएगी।
इस संशोधन के साथ, सीटों का आवंटन केवल अधिकृत काउंसलिंग तंत्र के माध्यम से ही किया जाएगा। किसी भी प्रत्यक्ष या विवेकाधीन प्रवेश की अनुमति नहीं है, जिससे प्रक्रिया की पारदर्शिता बढ़ेगी। सीटों का वितरण उम्मीदवारों की आपसी योग्यता और उनकी पसंद के आधार पर ही जारी रहेगा।
इसके अलावा, शैक्षणिक मानकों में कोई ढील नहीं दी जाएगी। संशोधित पर्सेंटाइल केवल पहले से ही योग्य एमबीबीएस डॉक्टरों के बीच पात्रता का दायरा बढ़ाता है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आधिकारिक अपडेट के अनुसार, यह कदम विशेष रूप से खाली बची सीटों को भरने के लिए उठाया गया है।

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