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अब मैथिली में भी पढ़ सकेंगे भारत का संविधान

Now you can read the Constitution of India in Maithili also
ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। अगर आप संस्कृत या मैथिली भाषा में संविधान पढ़ना चाहते हैं तो अब आपकी ये इच्छी पूरी हो जाएगी। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान दिवस के मौके पर मैथिली और संस्कृत भाषा में अनुवादित भारतीय संविधान की प्रतियां जारी कीं। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी समेत कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। इस अवसर पर एक विशेष डाक टिकट और सिक्क ा भी जारी किया गया। यह मैथिली भाषा के लिए एक बड़ा कदम है, जिसे 2004 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया था।

भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मैथिली और संस्कृत भाषा में संविधान की प्रतियों का विमोचन किया। यह कार्यक्रम संविधान निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विपक्ष के नेता राहुल गांधी, लोकसभा और राज्यसभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष बने।

मैथिली भाषा में संविधान का अनुवाद एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह भाषा 2004 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के समय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल की गई थी। इससे मैथिली को आधिकारिक भाषा का दर्जा मिला। संविधान अब देश की दो प्राचीन भाषाओं, मैथिली और संस्कृत में उपलब्ध होगा।

यह संविधान देश के प्रतिभाशाली लोगों की देन : राष्ट्रपति
राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में संविधान निर्माताओं को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा, ‘यह संविधान देश के प्रतिभाशाली लोगों की देन है। इसने देश की विविधता को अभिव्यक्ति दी है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘बीते 75 वर्षों में हमारा देश विश्व बंधु के रूप में उभरा है। आज कृतज्ञ राष्ट्र अपने संविधान निर्माताओं को नमन करता है।’ राष्ट्रपति ने देश की प्रगति, विशेषकर महिला सशक्तिकरण की दिशा में हुई प्रगति की सराहना की। उन्होंने महिला सांसदों के योगदान की भी प्रशंसा की।

राष्ट्रपति ने सरकार के जनसुविधाओं पर ध्यान केंद्रित करने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा, ‘हमारे संविधान का यही उद्देश्य है कि कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका मिलकर सामान्य लोगों के हितों के लिए काम करें।’ उन्होंने राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति में सभी के सहयोग और विविधता में एकता के महत्व पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री मोदी, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे समेत कई नेता मंच पर मौजूद थे। संविधान दिवस के मौके पर संसद के दोनों सदनों का संयुक्त सत्र बुलाया गया था। राष्ट्रपति ने सभी सदस्यों से संविधान की प्रस्तावना का पाठ भी करवाया।

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