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तोड़फोड़ से प्रभावित लोग आ सकते हैं अदालत : सुप्रीम कोर्ट

People affected by demolition can come to court: Supreme Court
ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तराखंड, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में अधिकारियों द्वारा अदालत के आदेश की अवमानना का आरोप लगाने वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति बी आर गवई, न्यायमूर्ति पी के मिश्रा और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले से नहीं जुड़ा है, इसलिए वह याचिका पर विचार नहीं कर रहे हैं। हालांकि कोर्ट ने साफ किया है कि जो लोग बुलडोजर कार्रवाई से प्रभावित हैं, वो अदालत आ सकते हैं।

पीठ ने कहा कि ‘हम भानुमती का पिटारा नहीं खोलना चाहते। विध्वंस से प्रभावित लोगों को न्यायालय आने दें’। दरअसल याचिकाकर्ता के वकील ने आरोप लगाया कि हरिद्वार, जयपुर और कानपुर में अधिकारियों ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद संपत्तियों को ध्वस्त किया। याचिकाकर्ता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा था कि उनकी अनुमति के बगैर तोड़फोड़ की कार्रवाई नहीं की जाएगी, लेकिन उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान के अधिकारियों द्वारा कोर्ट के आदेश की अवमानना की गई।

याचिकाकर्ता के वकील ने दीं ये दलीलें
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा, ‘सर्वोच्च न्यायालय का आदेश स्पष्ट था कि इस न्यायालय की अनुमति के बिना कोई तोड़फोड़ नहीं की जाएगी’। उन्होंने आरोप लगाया कि एक मामले में एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद संपत्ति को ध्वस्त कर दिया गया। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज ने कहा कि याचिकाकर्ता एक तीसरा पक्ष है और उसे तथ्यों की जानकारी नहीं है। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि जिसके खिलाफ तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई, वह फुटपाथ पर अतिक्रमण था जिसे अधिकारियों ने हटाया था। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता ने कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर अदालत का रुख किया था।

इसके बाद पीठ ने याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता इस कार्रवाई से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित नहीं है। तोड़फोड़ से प्रभावित व्यक्ति अदालत आ सकते हैं, उनकी याचिका पर पीठ सुनवाई करेगी। इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि तीन में से दो मामलों में प्रभावित व्यक्ति जेल में हैं। जिस पर पीठ ने कहा कि प्रभावित व्यक्तियों के परिवार के सदस्य भी अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर एक्शन पर लगाई थी रोक
गौरतलब है कि शीर्ष अदालत ने 17 सितंबर को आदेश दिया था कि 1 अक्टूबर तक पूरे देश में उसकी अनुमति के बिना कोई भी ध्वस्तीकरण कार्रवाई नहीं की जाएगी। कोर्ट ने कहा था कि किसी व्यक्ति का आरोपी या दोषी होना संपत्तियों को ध्वस्त करने का आधार नहीं है। हालांकि कोर्ट ने साफ किया था कि यह आदेश सार्वजनिक सड़कों, फुटपाथों, रेलवे लाइनों और जल निकायों पर अवैध निर्माणों पर लागू नहीं होगा।

शीर्ष अदालत ने 1 अक्टूबर को मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा था कि अगले आदेश तक उसका 17 सितंबर का अंतरिम आदेश लागू रहेगा।

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