ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। अब मिट्टी, पौधे और लोगों की सेहत की निगरानी एक विशेष पेंसिल और कागज (पेंसिल आन पेपर) सेंसर के जरिए की जा सकेगी। इसके जरिए मिट्टी की नमी, पौधों की शुष्कता के साथ इंसान के सांस लेने के तरीकों से सेहत की निगरानी की जा सकेगी।
शोधार्थियों ने ग्रेफाइट से तैयार ग्रैफिन और कागज की मदद से ऐसा सेंसर विकसित किया है जो नमी को लेकर काफी अधिक संवेदनशील होने के साथ ही परंपरागत सेंसर की तुलना में 90-95 फीसद सस्ता होगा। इन खूबियों की बदौलत ऐसे सेंसर का कृषि और स्वास्थ्य क्षेत्र में आसानी से इस्तेमाल किया जा सकेगा।
खास बात यह है कि विशेष तरह के सेंसर, अब सोने या प्लेटिनम जैसी महंगी धातुओं के बजाय पेंसिल और कागज के इस्तेमाल से बनी होगी। इसमें सिलिकान के बजाय लचीले और काफी कम कीमत वाले ग्रैफिन और कागज की मदद से तैयार सेंसर का इस्तेमाल किया जा सकेगा।
शोधार्थियों ने पेंसिल से खींचे गए इंटरडिजिटेटेड इलेक्ट्रोड (आईडीई) का इस्तेमाल कर एक लचीला कागजी, ग्राफीन आधारित सेंसर विकसित किया है। साधारण पेंसिल का इस्तेमाल सीधे कागज पर प्रवाहकीय (कंडक्टिव) ग्रेफाइट इलेक्ट्रोड बनाने के लिए जबकि ग्रैफिन आक्साइड (जीओ) सक्रिय सेंसिंग तत्व के रूप में काम करता है। यह तरीका महंगी धातुओं सहित अन्य जरूरतों को खत्म कर देता है।

