संजय द्विवेदी
लखनऊ। प्रदेश सरकार औद्योगिक निवेश को गति देने और राजस्व संसाधनों को मजबूत करने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसी क्रम में आबकारी विभाग नई आबकारी नीति 2026-27 तैयार कर रहा है। प्रस्तावित नीति में प्रदेश में डिस्टिलरी प्लांट्स की स्थापना को प्रोत्साहित करने और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई खास सुविधाएं देने पर विचार किया जा रहा है।
राजस्व बढ़ाने पर जोर
प्रदेश सरकार ने आबकारी विभाग को राजस्व वृद्धि के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए थे। इन्हीं निर्देशों के अनुपालन में विभाग द्वारा नई आबकारी नीति पर गहन मंथन किया जा रहा है। नीति का उद्देश्य न केवल राजस्व बढ़ाना है बल्कि औद्योगिक निवेश को आकर्षित करना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना भी है।
आसान लाइसेंस प्रक्रिया
नई आबकारी नीति में डिस्टिलरी प्लांट्स की स्थापना को सरल और निवेशकों के लिए आकर्षक बनाने की तैयारी है। इसके तहत लाइसेंस प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध करने, शुल्क संरचना को युक्तिसंगत बनाने तथा आवश्यक अनुमतियों में सुविधाएं देने पर विचार किया जा रहा है। इससे प्रदेश में निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और उत्तर प्रदेश डिस्टिलरी उद्योग के क्षेत्र में एक बड़े केंद्र के रूप में उभर सकेगा।
निर्यात को विशेष प्रोत्साहन
नई नीति में निर्यात पर विशेष फोकस है। प्रदेश में उत्पादित स्पिरिट, अल्कोहल और इससे जुड़े उत्पादों के निर्यात को सरल बनाने के लिए नियमों में ढील, लॉजिस्टिक्स को सुगम करने और अतिरिक्त प्रोत्साहन देने के प्रस्तावों पर चर्चा चल रही है। इससे प्रदेश के उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे और विदेशी मुद्रा अर्जन में भी वृद्धि होगी।
किसानों को लाभ और रोजगार बढ़ेगा
डिस्टिलरी उद्योग के विस्तार से आबकारी विभाग को राजस्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की उम्मीद है। इसके साथ ही कृषि आधारित कच्चे माल की मांग बढ़ेगी, जिससे गन्ना, अनाज और अन्य कृषि उत्पादों की खपत में इजाफा होगा। इससे किसानों की आय बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। डिस्टिलरी प्लांट्स के विस्तार से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है।
यूपी में नई आबकारी नीति की तैयारी

