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‘सिंदूर’ जैसे ड्रोन अटैक से निपटने के लिए बनाया जा रहा रडार, लद्दाख में होगा ट्रायल

Radar being developed to counter drone attacks like 'Sindoor', trial to be conducted in Ladakh
ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान ने सैकड़ों ड्रोन से अटैक की कोशिश की थी, जिसे भारत की सेना ने नाकाम किया था। सेना लगातार ड्रोन वॉरफेयर में क्षमता बढ़ा रही है, लेकिन अभी जो रडार हैं, वे ड्रोन का पता लगाने में पूरी तरह सफल नहीं हैं। भारत में अब ऐसा रडार सिस्टम बन रहा है, जो ड्रोन का दूर से ही पता लगा लेगा। नौसेना के ‘स्वावलंबन-2025’ में उन स्वदेशी उपकरणों और सिस्टम्स को दिखाया गया है, जो सेनाओं की जरूरत पूरी करने के लिए बन रहे हैं। इसी में वह रडार भी शामिल है जो ड्रोन का पता लगाकर उसे नाकाम करेगा। खास बात यह भी है कि इसे देश की जेन-जेड तैयार कर रही है। इस सिस्टम को 22 से 30 साल के युवा बना रहे हैं।
स्वदेशी कंपनी ‘सी14 ऑटोनोमस डिफेंस’ के योगेश ने बताया कि नौसेना की जरूरत के मुताबिक श्री कैमरा रडार बनाया है। इसी में ड्रोन डिटेक्शन सिस्टम लगाया जा रहा है। इसे पूरी तरह तैयार होने में करीब एक साल लगेगा। किसी भी उपकरण को सेना में शामिल करने से पहले उसका हर स्थिति में ट्रायल करना होता है। रेगिस्तान में इसका ट्रायल हो चुका है। सेना की नॉर्दर्न कमांड अब इसका ट्रायल लद्दाख में करने वाली है। यह ड्रोन डिटेक्शन रडार करीब 70% तैयार है।
सिर्फ 75 किलो होगा इसका वजन
यह सिर्फ ड्रोन को डिटेक्ट ही नहीं करेगा, बल्कि इसमें एम्युनिशन भी होगा जो ड्रोन को नष्ट करेगा। इस रडार का वजन 75 किलो है, जिससे इसे अलग-अलग जगहों पर ले जाना आसान है। ये राजस्थान या मैदानी इलाके में 2 किलोमीटर दूर से ड्रोन का पता लगा सकेगा। इसे 500 मीटर दूर से भी ऑपरेट किया जा सकेगा। अभी इसका बैटरी बैकअप करीब 4-5 घंटे का है लेकिन इसे बढ़ाकर 24 घंटे किया जा रहा है।

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