Site icon World's first weekly chronicle of development news

बदलने वाले हैं कॉलेजों में शिक्षक भर्ती के नियम

ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए योग्यता मानदंड में बड़े बदलाव करने जा रहा है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने यूजीसी के नए नियमों का ड्राफ्ट जारी किया है। यूजीसी के अध्यक्ष जगदीश कुमार के अनुसार, इन नए नियमों का मकसद शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया को बदलना और उसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के लक्ष्यों के साथ जोड़ना है। यह ड्राफ्ट ‘यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में शिक्षकों और एकेडमिक स्टाफ की नियुक्ति के लिए न्यूनतम योग्यता, नियम 2025’ के संबंध में जारी किया गया है। योग्यता मानदंड में बड़े बदलाव के ड्राफ्ट पर सलाह भी मांगी गई है।

संभावित नए नियम
अभी, उम्मीदवारों को ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन और पीएचडी में एक ही विषय में पढ़ाई करनी होती है, तभी वे शिक्षक बन सकते हैं लेकिन नए दिशानिर्देशों के अनुसार, उम्मीदवार यूजीसी नेट या पीएचडी विषयों से संबंधित शिक्षण पदों के लिए आवेदन कर सकेंगे, भले ही उनकी पिछली योग्यता किसी और विषय या क्षेत्र में हो।

नए नियमों का उद्देश्य शिक्षकों की नियुक्ति में ज्यादा लचीलापन लाना है। अब अलग-अलग विषयों और कौशल वाले उम्मीदवारों की नियुक्ति पर भी विचार किया जा सकेगा। नए नियमों के अनुसार, अब जरूरी नहीं है कि शिक्षकों के पास पीएचडी या यूजीसी नेट की योग्यता हो। ‘प्रैक्टिस के प्रोफेसर’ योजना के तहत इंडस्ट्री में काम कर रहे लोगों को भी इसके लिए नियुक्त किया जा सकेगा।

अगर प्रमोशन की बात करें तो नए नियमों में शिक्षकों के प्रमोशन के लिए एपीआई सिस्टम का उपयोग नहीं होगा। यूजीसी अध्यक्ष ने कहा कि हमारी यूनिवर्सिटीज में कई भूमिकाओं और योगदानों को बढ़ावा देना जरूरी है। नए नियम टीचर्स को अपने जुनून को आगे बढ़ाने का मौका देने के साथ उनकी चुनौतियों को भी कम करेंगे।

यूजीसी अध्यक्ष ने बताया कि अभी टीचर्स भर्ती में अकादमिक प्रदर्शन, जैसे पेपर प्रकाशित करना और एकेडमिक परफॉर्मेंस इंडिकेटर (एपीआई) पॉइंट्स पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। यूजीसी के नए नियम एनईपी 2020 के अनुरूप होंगे। इनका उद्देश्य शिक्षा और उद्योग के बीच की खाई को कम करना है।

Exit mobile version