नई दिल्ली। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की सकीना ठाकुर ने कमाल कर दिया है। उन्होंने रूढ़िवादी सोच को दरकिनार कर ग्रामीण उद्यमिता की नई मिसाल कायम की है। हिस्ट्री में मास्टर्स डिग्री होने के बावजूद उन्होंने मंडी में उपलब्ध दूध की क्वालिटी से निराश होकर एक साहसिक कदम उठाया। सकीना ने तुंगल घाटी के सुदूर कुन गांव में अपना ‘सकीना डेयरी फार्म’ शुरू किया। 1.25 लाख रुपये की शुरुआती बचत और बैंक लोन से शुरू हुआ यह उद्यम आज लगभग 2 लाख रुपये की मासिक आय (सहकारी समिति के साथ) पैदा कर रहा है। वह ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक स्वतंत्रता की प्रतीक बन गई हैं। आइए, यहां सकीना ठाकुर की सफलता के सफर के बारे में जानते हैं।
मंडी के वल्लभ गवर्नमेंट कॉलेज से इतिहास में मास्टर्स डिग्री प्राप्त करने वाली सकीना ठाकुर के लिए सरकारी नौकरी का पारंपरिक रास्ता आसान था लेकिन, उन्होंने इसे छोड़कर उद्यमिता को चुना। मंडी शहर में दूध की खराब क्वालिटी ने उन्हें उच्च गुणवत्ता वाला पौष्टिक दूध उपलब्ध कराने के लिए प्रेरित किया। फिटनेस, मॉडलिंग और बॉक्सिंग में दिलचस्पी रखने वाली सकीना ने परिवार के दबाव के बावजूद अपने दिल की आवाज सुनी। हालांकि, कुन गांव से आने के कारण शुरुआती दौर में उन्हें पशुओं के साथ काम करने के लिए उपहास का सामना करना पड़ा। कई लोगों ने ये तक कहा कि डेयरी चलाना पढ़ी-लिखी ‘औरतों का काम नहीं है’ लेकिन, स्थानीय डेयरी किसान चिंता देवी और यूट्यूब वीडियो से प्रेरित होकर उन्होंने अपने डेयरी फार्म की स्थापना का दृढ़ संकल्प लिया।
सकीना अपने फार्म से लगभग 1.25 लाख रुपये महीने कमाती हैं, जो ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता का प्रमाण है। वह गाय के दूध के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को 51 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ाए जाने से खुश हैं।
ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक स्वतंत्रता की प्रतीक बन गईं सकीना

