ब्लिट्ज ब्यूरो
जयपुर। एक दशक पहले जब सीकर की रेतीली और गर्म धरती पर संतोष देवी ने सेब और अनार की खेती का सपना देखा, तो उनका मजाक उड़ाया गया। बेरी गांव स्थित अपने छोटे से खेत के लिए वह सेब और अनार के पौधे ले आई, तो सबने इसे खारिज कर दिया। पड़ोसियों से लेकर कृषि विशेषज्ञों तक ने कहा कि बंजर जमीन पर सेब नहीं उगाया जा सकता है। क्योंकि, यहां पानी की कमी और मौसम बेहद गर्म है। लेकिन संतोष देवी ने अपने असंभव से सपने को सच कर दिखाया, जिसकी बदौलत उन्हें राष्ट्रपति भवन से न्योता मिला, गणतंत्र दिवस पर सम्मानित किया गया। राज्य सरकार की ओर से कई बार इनोवेटिव किसान के रूप में राजस्थान सम्मानित हो चुकी सतीष देवी को अब अपने जीवन का सबसे भावुक सम्मान मिला है। उन्हें इस साल गणतंत्र दिवस समारोह के लिए एक विशिष्ट प्रतिभागी के रूप में बुलाया गया था।
लेटर मिला, तो बंद ही नहीं हो रहा था मुस्कुरानाः राष्ट्रपति भवन से पत्र आया, तो उनका परिवार और गांव खुशी से झूम उठा। इस लम्हे ने संतोष देवी के कई साल के संघर्ष को गर्व के आंसुओं में बदल दिया। उनके बेटे राहुल खेदार ने कहा, ‘निमंत्रण 4 दिन पहले आया है। मेरी मां मुस्कुराना बंद नहीं कर पा रही थी। उन्होंने वर्षों तक चुपचाप काम किया। असफलताओं, संदेहों और आर्थिक परेशानियों का सामना किया। उनकी मेहनत को पहचान मिल गई है।
‘जो मान्या कोनी, वे इब पूंछे हैं’
संतोष देवी बताती है कि उन्होंने लगभग 10 साल तक, कठोर परिस्थितियों में बागवानी के साथ प्रयोग किया। पानी की कमी, खराब मिट्टी और बार-बार संदेह के बावजूद हार मानने से इनकार कर दिया।
यह कहते हुए उनकी आंखें भर आईं कि ‘मैंने पिछले 10 साल से अनार, सेब और मौसमी उगाए है। कुछ दिन ऐसे भी थे जब मैं थका हुआ महसूस करती थी, लेकिन मैं तरीके बदलती रही। मिट्टी, पानी और खाद देना, सब कुछ। मुझे विश्वास था कि एक दिन जमीन जवाब देगी। संतोष देवी को उनके विश्वास का फल मिला। उस जगह सेब के पेड़ों पर फल लगने लगे, जहां किसी ने सोचा भी नहीं था।

