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90 दिन काम पर ही मिल जाएगी सोशल सिक्योरिटी

Social security will be available only after 90 days of work
ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के श्रम मंत्रालय ने एप-आधारित डिलीवरी पार्टनर, कैब ड्राइवर और फ्रीलांसर जैसे अस्थायी कामगारों (गिग वर्कर) के लिए बड़ी तैयारी कर ली है। दरअसल, श्रम मंत्रालय ने सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने के लिए साल भर में कम-से-कम 90 दिन काम करने का प्रस्ताव रखा है। सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत बनाए गए नए ड्राफ्ट नियमों में यह प्रस्ताव रखा गया है। यह ड्राफ्ट 31 दिसंबर को जारी किया गया और इस पर हितधारकों से सुझाव मांगे गए हैं। बता दें कि सरकार ने सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 समेत चार नए श्रम कानूनों को 21 नवंबर, 2025 को नोटिफाई किया था।

क्या कहता है नियम?
ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक, यदि कोई अस्थायी या ऑनलाइन मंच से जुड़ा कामगार किसी एक कंपनी या एप के साथ पिछले वित्त वर्ष में कम-से-कम 90 दिन काम करता है, तो वह सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लिए पात्र माना जाएगा। अगर इस अवधि में वह एक से अधिक एप या कंपनियों के साथ काम करता है, तो कुल मिलाकर उसे न्यूनतम 120 दिन काम करना होगा। मंत्रालय ने साफ किया है कि किसी दिन चाहे जितनी भी कमाई हुई हो, यदि उस दिन काम किया गया है तो उसे एक कार्यदिवस माना जाएगा। अगर कोई डिलीवरी पार्टनर या कैब ड्राइवर किसी दिन एप के जरिये एक भी ऑर्डर या सफर को पूरा करता है, तो वह दिन उसके कामकाजी दिन के रूप में गिना जाएगा। यहां तक कि यदि कोई व्यक्ति एक ही दिन में तीन अलग-अलग एप के लिए काम करता है, तो उसे तीन दिन का काम माना जाएगा।

गिग वर्कर की क्या है परिभाषा
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने कहा कि ऐसे सभी गिग वर्कर इसमें शामिल होंगे, जिन्हें कंपनियां सीधे या किसी दूसरी सहयोगी कंपनी या एजेंसी के जरिये काम पर रखती हैं। हर कंपनी को अपने साथ जुड़े अस्थायी कामगारों की जानकारी नियमित रूप से सरकारी पोर्टल पर अपडेट करनी होगी। जानकारी अपडेट नहीं होने पर कामगार को सामाजिक सुरक्षा का लाभ नहीं मिल पाएगा। नए नियमों के तहत, 16 साल या उससे अधिक उम्र के हर अस्थायी कामगार को ‘आधार’ जैसे दस्तावेजों के आधार पर एक निर्धारित पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन करना होगा। रजिस्ट्रेशन के बाद उन्हें एक डिजिटल पहचान पत्र मिलेगा, जिसे पोर्टल से डाउनलोड किया जा सकेगा। गिग वर्कर के लिए एक अलग सामाजिक सुरक्षा कोष बनाया जाएगा, जिसमें कंपनियों से लिया गया योगदान जमा होगा। यदि कोई कंपनी तय समय पर यह योगदान जमा नहीं करती है, तो उसे हर महीने एक प्रतिशत ब्याज भी देना होगा।

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