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कोलकाता कांड में पुलिस की कार्यशैली से सुप्रीम कोर्ट नाखुश

Supreme Court
ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टर से दरिंदगी की एफआईआर दर्ज करने में कोलकाता पुलिस द्वारा की गई 14 घंटे की देरी पर सवाल उठाया। साथ ही कोर्ट ने पुलिस की कार्यशैली पर भी नाखुशी जताई। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और मनोज मिश्रा की पीठ ने पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों को तुरंत काम पर लौटने का निर्देश देते हुए कहा कि ड्यूटी की कीमत पर विरोध प्रदर्शन नहीं हो सकता। शीर्ष अदालत ने प्रदर्शनकारी डॉक्टरों से कहा कि यदि वे काम पर लौट आते हैं तो उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

डॉक्टरों को विश्वास दिलाइये
कोर्ट ने कहा, पश्चिम बंगाल सरकार को डॉक्टरों को यह विश्वास दिलाने के लिए समुचित कदम उठाने चाहिए कि उनकी सुरक्षा और संरक्षा से जुड़ी चिंताओं पर उचित कदम उठाए जा रहे हैं। पीठ ने पीड़िता की तस्वीरें सभी सोशल मीडिया मंचों से तत्काल हटाने का भी निर्देश दिया। कोर्ट ने ट्रेनी डॉक्टर के शव के पोस्टमार्टम के लिए जरूरी दस्तावेज नहीं होने पर गंभीर चिंता जताई।

– 09 अगस्त को सेमिनार हॉल में मिला था ट्रेनी डॉक्टर का शव

पहलू की जांच
शीर्ष अदालत ने सीबीआई को इस पहलू की जांच करने को कहा। इससे पहले, बंगाल सरकार की ओर अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पीठ को बताया कि उन्हें तत्काल दस्तावेज नहीं मिल पाए और वे इस पर संबंधित पक्ष से बात करेंगे। सीबीआई की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि चालान उनके रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं है।

सुनवाई 17 तक स्थगित
पीठ ने रिपोर्ट का निरीक्षण करने के बाद मामले की सुनवाई 17 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी। साथ ही, सीबीआई को पीठ के समक्ष रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि डॉक्टरों की हड़ताल के चलते प्रदेश में इलाज नहीं मिलने से अब तक 23 लोगों की मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि डॉक्टरों के विरोध प्रदर्शनों के चलते राज्य में स्वास्थ्य सेवा पूरी तरह चरमरा गई है। आगे की जांच रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया। पीठ ने सीबीआई को नए घटनाक्रमों को रेखांकित करते हुए एक नई स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा है।

• कुछ तो गड़बड़ है: कोर्ट
मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा कि शव के साथ कौन से कपड़े व सामान भेजे गए थे, हम इसे देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि यदि दस्तावेज गायब हैं तो कुछ गड़बड़ है। जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि ऊपर तीसरा कॉलम देखें, कांस्टेबल को यह (फॉर्म) ले जाना चाहिए। इसे काट दिया गया है। इसलिए शव को जांच के लिए भेजे जाने पर इस चालान का कोई संदर्भ नहीं है। यह स्पष्ट करने की जरूरत है कि अगर यह दस्तावेज गायब हैं, तो क्या कोई गड़बड़ी है।

हड़ताल के चलते 23 लोगों की जान गई
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पीठ के समक्ष रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि डॉक्टरों की हड़ताल के चलते प्रदेश में इलाज नहीं मिलने से अब तक 23 लोगों की मौत हो गई।

पीड़िता के परिवार को पैसे की पेशकश नहीं की: ममता
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि उन्होंने पीड़ित महिला चिकित्सक के माता-पिता को कभी पैसों की पेशकश नहीं की। ममता ने कहा, मैंने पीड़ित परिवार से कहा कि अगर वे अपनी बेटी की याद में कुछ करना चाहते हैं तो हमारी सरकार उनके साथ है।

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