विनोद शील
नई दिल्ली। एशिया के मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभरने की भारत की कोशिशों को और अधिक गति प्रदान करनी होगी। एशिया मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स (एएमआई) 2026 की रिपोर्ट में भारत 11 प्रमुख एशियाई देशों की लिस्ट में 6वें नंबर पर है। 2024 की रिपोर्ट में भारत 8 देशों में चौथे नंबर पर था लेकिन पिछले साल से यह छठे पायदान पर स्थिर बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनने के लिए अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर और टैक्स नियमों में और ज्यादा सुधार करने की जरूरत बताई गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी भारत को विश्व के मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करना चाहते हैं। इसीलिए वह ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ के अपने संकल्प को तीव्र गति से आगे बढ़ाने में रत हैं।
हाल ही में स्टार्टअप इंडिया पहल के एक दशक पूरे होने पर पीएम मोदी ने जोर देते हुए कहा, भारत की महत्वाकांक्षा केवल भागीदारी तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि वैश्विक नेतृत्व हासिल करने का लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बीते दशकों में भारत ने डिजिटल स्टार्टअप और सेवा क्षेत्रों में उपलब्धियां हासिल की हैं और अब स्टार्टअप उद्यमों के लिए मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करने का समय आ गया है। उन्होंने भविष्य का नेतृत्व करने के लिए रोडमैप देते हुए विश्वस्तरीय गुणवत्ता वाले नए उत्पादों और अद्वितीय तकनीकी विचारों के निर्माण का आह्वान किया। मोदी ने आश्वासन दिया कि सरकार हर प्रयास में स्टार्टअप उद्यमों के साथ दृढ़तापूर्वक खड़ी है।
स बीच इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड (आईएमएफ) से अच्छी खबर आई है जिसने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) ग्रोथ के अनुमान को 0.7% बढ़ाकर 7.3 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले अक्टूबर में आईएमएफ ने इसके 6.6% रहने का अनुमान जताया था। आईएमएफ ने हाल ही में जारी अपनी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में कहा है कि भारत में विकास दर उम्मीद से कहीं बेहतर रही है।
क्या है भविष्य की राह?
भारत का लक्ष्य वित्त वर्ष 2026 तक 1 ट्रिलियन डॉलर की मैन्युफैक्चरिंग इकोनॉमी बनने का है। रिपोर्ट में सुझाया गया है कि भारत को केवल लेबर की उपलब्धता पर निर्भर रहने के बजाय स्किल डेवलपमेंट और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान देना होगा। अगर भारत अपनी लॉजिस्टिक्स लागत को और कम कर लेता है तो वह अगले कुछ वर्षों में वियतनाम और मलेशिया को कड़ी टक्क र दे सकता है।
चीन नंबर-1 पर बरकरार, मलेशिया की लंबी छलांग
इंडेक्स के मुताबिक चीन अभी भी एशिया में मैन्युफैक्चरिंग के मामले में दुनिया की पहली पसंद बना हुआ है।
वहीं मलेशिया ने इस बार बड़ी कामयाबी हासिल की है। मलेशिया ने वियतनाम को पीछे छोड़कर दूसरा स्थान हासिल किया है। वियतनाम तीसरे, सिंगापुर चौथे और दक्षिण कोरिया 5वें नंबर पर है जबकि इंडोनेशिया 7वें और थाईलैंड 8वें नंबर पर है।
8 पैमानों पर मापी गई देशों की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता
यह रिपोर्ट डिजन शिरा एंड एसोसिएट्स ने जारी की है। इसमें किसी भी देश की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को 8 मुख्य आधारों पर परखा गया है। इनमें इकोनॉमी, पॉलिटिकल रिस्क, बिजनेस एनवायरनमेंट, इंटरनेशनल ट्रेड, टैक्स पॉलिसी, इन्फ्रास्ट्रक्चर, लेबर फोर्स और एनवायरनमेंट-सोशल-गवर्नेंस (ईएसजी) शामिल हैं।
2026-27 के लिए भी बढ़ाया अनुमान
इधर आईएमएफ ने कहा है कि खास तौर पर वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी और चौथी तिमाही में भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूत पकड़ दिखाई है जिसका असर पूरे साल के आंकड़ों पर दिखेगा। आईएमएफ ने सिर्फ इस साल ही नहीं, बल्कि अगले वित्त वर्ष के लिए भी ग्रोथ अनुमान बढ़ाया है। 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 6.2% से बढ़ाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया गया है।
भारत कहां मजबूत और कहां सुधार की जरूरत?
मजबूती: भारत के पास बड़ी वर्कफोर्स (मजदूरों की उपलब्धता) और बढ़ता घरेलू बाजार सबसे बड़ी ताकत है। सरकार की पीएलआई स्कीम (उत्पादन-संबद्ध प्रोत्साहन (प्रोडक्शन-लिंक्ड-इंसेंटिव) जैसी नीतियों की वजह से इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा सेक्टर में काफी निवेश आ रहा है।
कमजोरी: इन्फ्रास्ट्रक्चर के मामले में भारत अभी भी सिंगापुर और चीन जैसे देशों से काफी पीछे है।
इसके अलावा भ्रष्टाचार को लेकर धारणा और संस्थागत स्थिरता के मामले में भी भारत को कम अंक मिले हैं। टैक्स पॉलिसी और लॉजिस्टिक्स कॉस्ट को कम करना भारत के लिए बड़ी चुनौती है।
भ्रष्टाचार व राजनीतिक जोखिम भी बड़ी चिंता
• रिपोर्ट में बताया गया है कि भ्रष्टाचार के मामले में भारत अपने प्रतिस्पर्धी 6 देशों से पीछे है। सिंगापुर इस मामले में सबसे पारदर्शी और सुरक्षित माना गया है। • विशेषज्ञों का कहना है कि अगर भारत को ‘मेक इन इंडिया’ को पूरी तरह सफल बनाना है, तो उसे अपनी रेगुलेटरी प्रोसेस को और आसान बनाना होगा।
भारत की रेटिंग में सुधार
भारत की रेटिंग हाल ही में आर्थिक (सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग), इनोवेशन, लॉजिस्टिक्स, और तकनीक जैसे क्षेत्रों में सुधरी है जहां वैश्विक एजेंसियों ने रेटिंग बढ़ाई है और ग्लोबल इंडेक्स में रैंकिंग सुधरी है। ।
सुधरी हुई रेटिंग/रैंकिंग वाले क्षेत्र
आर्थिक/क्रेडिट रेटिंग: विभिन्न एजेंसियों (जैसे आरएंडआई, एसएंडपी, मूडीज) ने भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को मजबूत अर्थव्यवस्था, मजबूत घरेलू मांग, अच्छी सरकारी नीतियों और वित्तीय स्थिति में सुधार के कारण अपग्रेड किया है।
इनोवेशन: ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स 2025 में भारत की रैंक में सुधार हुआ है।
लॉजिस्टिक्स: लॉजिस्टिक्स परफॉरमेंस इंडेक्स 2023 में भी भारत की रैंकिंग सुधरी है।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी : विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन के तहत कई प्रणालियां स्थापित की हैं।
गिरावट या चिंता वाले क्षेत्र
भ्रष्टाचार : ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के करप्शन परसेप्शन इंडेक्स 2024 में भारत की रैंकिंग गिरी है और स्कोर कम हुआ है।
पर्यावरण: ईपीआरई 2022-24 में भारत की रैंकिंग 2022 की तुलना में गिरी है, हालांकि यह एक लंबी अवधि का इंडेक्स है।
विश्व बैंक कर्ज: एक रिपोर्ट के अनुसार भारत वर्ल्ड बैंक का सबसे बड़ा कर्जदार देश बन गया है, हालांकि यह कर्ज अर्थव्यवस्था के विकास के लिए है।
क्या है सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग
सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग किसी देश की सरकार की कर्ज चुकाने की क्षमता और इच्छाशक्ति का आकलन है जो निवेशकों को उस देश में निवेश से जुड़े जोखिम (जैसे राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता) को समझने में मदद करती है, और यह रेटिंग एसएंडपी, मूडीज और फिच जैसी एजेंसियां देती हैं जो बेहतर रेटिंग के लिए देश को विदेशी निवेश और कम ब्याज दरों पर कर्ज प्राप्त करने में मदद करती हैं।
– मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस करना जरूरी : पीएम मोदी
– वियतनाम और मलेशिया को भारत दे सकता है टक्कर
– आगे निकलना है तो इंफ्रा और टैक्स में सुधार आवश्यक

