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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत को जगह देने का अभियान बढ़ा आगे

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ललित दुबे

वाशिंगटन। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधार की भारत की मांग को व्यापक तौर पर समर्थन मिल रहा है। इसकी बानगी इस साल की संयुक्त राष्ट्र महाधिवेशन (यूएनजीए) में भी देखने को मिली है। यहां कम से कम नौ देशों के प्रतिनिधियों ने अपने संबोधन में यूएनएससी में स्थायी सदस्यता के भावी उम्मीदवार के तौर पर भारत का नाम लिया।

भारत के अलावा ब्राजील, अफ्रीकी महादेश के प्रतिनिधि के तौर पर भी किसी देश को स्थायी सदस्य बनाने का समर्थन मिला है लेकिन एक खास बात भारत के समर्थन में यह रही कि मौजूदा पांच स्थायी सदस्यों में से चार- अमेरिका, इंगलैंड, रूस और फ्रांस ने एक बार फिर दोहराया है कि वह भारत की दावेदारी के पक्ष में हैं। सिर्फ चीन ही एकमात्र ऐसा देश है जिसने इस बार भी भारत का नाम नहीं लिया है। हालांकि उसके प्रतिनिधि की तरफ से भी संयुक्त राष्ट्र के मौजूदा स्वरूप में बदलाव की बात कही गई है। अमेरिका आधिकारिक तौर पर लगातार यूएनएससी में भारत को शामिल करने की पैरवी करता रहा है।

– नौ देशों के प्रतिनिधियों ने स्थायी सदस्यता के भावी उम्मीदवार के तौर पर लिया भारत का नाम

23 सितंबर को आयोजित ‘समिट आफ फ्यूचर्स’ में भाषण देते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकन ने संयुक्त राष्ट्र में सुधार के साथ ही भारत को स्थायी सदस्यता देने का समर्थन किया था। इस आयोजन में पीएम नरेन्द्र मोदी ने अपने भाषण में संयुक्त राष्ट्र में सुधार को वैश्विक शांति और विकास के लिए सबसे जरूरी काम करार दिया था। इस साल भारत ने जी-4, जी-69 समूहों की बैठक के जरिये भी संयुक्त राष्ट्र सुधार के एजेंडे को धार देना जारी रखा है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि के कार्यालय की तरफ से एक्स पर बताया गया है कि इस साल (यूएनजीए-79) में भारत चर्चा का विषय रहा है। यूगांडा, चिली, पुर्तगाल, बेलारूस, भूटान, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, माइक्रोनेशिया जैसे देशों के प्रमुखों ने अपने संबोधन में सीधे तौर पर भारत का नाम लिया है और भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का सदस्य बनाने की मांग पेश की है। गौरतलब है कि ‘समिट आफ फ्यूचर्स’ के बाद वैश्विक नेताओं की तरफ से ‘पैक्ट आफ द फ्यूचर’ नाम से घोषणापत्र को स्वीकार करने का एलान किया गया है। इसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को शामिल किया गया है। इसमें संयुक्त राष्ट्र के मौजूदा स्वरूप में बदलाव करने के बाद इसे और ज्यादा पारदर्शी, लोकतांत्रिक, प्रभावशाली बनाने की बात कही गई है। इसके लिए ज्यादा देशों को प्रतिनिधित्व देने की भी बात है।

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