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देश की एयर डिफेंस की ताकत को मिलेगी और मजबूती

The country's air defense power will get further strengthened
ब्लिट्ज ब्यूरो

नई दिल्ली। रक्षा मंत्रालय ने सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए चालू वित्तवर्ष 2025-26 में 1.82 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (डीएसी) ने इंडियन एयर फोर्स के लिए 36 से अधिक अतिरिक्त मेटियोर बियॉन्ड-विजुअल-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइलों की खरीद के लिए औपचारिक रूप से ‘एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी’ (एओएन) दे दी है। इस खरीद को मंजूरी से वायु सेना की एयर डिफेंस क्षमता मजबूत होगी।

फाइनल डील से पहले एओएन का फैसला क्यों?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने इस सप्ताह अपने सबसे एडवांस फ्रांससी राफेल फाइटर जेट के लिए 36 मीटियोर एयर-टू-एयर मिसाइलों की खरीद को अप्रूव किया है। फॉलो-ऑन डील के फाइनल क्लोजर से पहले एओएन लेने का फैसला, प्रोसीजरल अप्रूवल को ‘फ्रंट-लोड’ करने की स्ट्रैटेजी दिखाता है। इससे कमर्शियल बातचीत फाइनल होने के बाद डिलीवरी टाइमलाइन कम हो जाएगी। रक्षा मंत्रालय के इस कदम से इंडियन एयर फोर्स के फ्रंटलाइनर राफेल फाइटर जेट फ्लीट के लिए युद्ध क्षमताओं को अधिक मजबूती मिलेगी।

मीटियोर मिसाइल की खासियत
यूरोपीय कंसोर्टियम एमबीडीए की तरफ से बनाई जाने वाली मीटियोर मिसाइल अपने अनोखे प्रोपल्शन सिस्टम की वजह से आधुनिक हवाई युद्ध में गेम-चेंजर की पहचान रखती है। यह पारंपरिक हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के विपरीत एक सॉलिड-फ्यूल वेरिएबल फ्लो डक्टेड रॉकेट (रैमजेट) से चलती है।

यह टेक्नोलॉजी मिसाइल को क्रूज के दौरान अपने इंजन को थ्रॉटल करने और मैक 4 से अधिक स्पीड तक पहुंचने की अनुमति देती है। इससे, मिसाइल के टारगेट तक पूरे रास्ते में हाई एनर्जी लेवल बना रहता है। इस यूरोपीय लंबी दूरी की मिसाइल की रेंज 200 किलोमीटर तक है। ऐसे में वायुसेना पायलट दुश्मन के डिफेंस के खतरनाक दायरे से बाहर रहते हुए विवादित एयरस्पेस पर हावी रह सकेंगे।

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