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भारत की रक्षा क्रांति का उड़ान काल शुरू

The flight period of India's defense revolution begins
विनोद शील

नई दिल्ली। गुजरात के वडोदरा शहर में स्पेन की कंपनी एयर बस और टाटा की टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (टीएएसएल) मिलकर वायुसेना के लिए सी295 विमान बनाएंगे। यह भारत की एयरोस्पेस इंडस्ट्री, मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम और रक्षा क्षमताओं के लिए मील का अहम पत्थर ही नहीं बल्कि अनेक मायनों में यह भारत के लिए गेम चेंजर साबित होगा। इसे भारत की रक्षा क्रांति के उड़ान काल का आरंभ भी कहा जा सकता है।

प्राइवेट सेक्टर में पहली फैक्ट्री
भारत में प्राइवेट सेक्टर में सैन्य विमान बनाने की यह पहली फैक्ट्री (फाइनल असेंबली लाइन) है जहां सैन्य विमानों के कलपुर्जों को जोड़कर विमानों को अंतिम रूप दिया जाएगा। टीएएसएल यहां 40 विमान बनाएगा। स्पेन की कंपनी मैन्युफैक्चरिंग, ट्रेनिंग और लॉजिस्टिक्स में मदद करेगी।
पीएम नरेन्द्र मोदी और स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने पिछले दिनों वडोदरा में विमान बनाने वाली फैक्ट्री की शुरुआत की। पीएम मोदी ने इसे ऐतिहासिक एवं रक्षा क्षेत्र की उपलब्धि बताते हुए एक पोस्ट लिखी है।

कार्य संस्कृति भारतीयों की क्षमताओं का प्रतीक
उन्होंने कहा कि एक समय हमारी सेनाओं को रक्षा उपकरणों की गंभीर कमी का सामना करना पड़ा था लेकिन आज आत्मनिर्भरता के युग में हम उस मुकाम तक पहुंच गए हैं जिस पर हर भारतीय को गर्व हो सकता है। उन्होंने लिखा, भारत की रक्षा क्रांति का यह उड़ान काल है। भारत की रक्षा और एयरोस्पेस यात्रा में एक महत्वपूर्ण अवसर देखने को मिला जो एक बड़ी उपलब्धि है। प्रधानमंत्री ने लिखा, ये उपलब्धियां हमारा गौरव बढ़ाती हैं। महज दो साल में हम शिलान्यास से परिचालन सुविधा तक पहुंचे हैं। यह नई कार्य संस्कृति और भारतीयों की क्षमताओं का प्रतीक है। अब बात करते हैं कि किस तरह से सी295 का निर्माण भारत के लिए गेम चेंजर साबित होगा। इसे हम इन कुछ बिंदुओं से समझ सकते हैं।

1- बढ़ेगी भारत की सैन्य क्षमता
भारतीय वायुसेना में सी295 विमान शामिल होने से देश की सामरिक एयरलिफ्ट क्षमता बढ़ेगी। यह मल्टीरोल सैनिक विमान है। इसे सैनिकों और सामान को ढोने, घायल सैनिकों को अस्पताल पहुंचाने, दूसरे विमान में तेल भरने और समुद्री गश्त सहित कई तरह के मिशन में इस्तेमाल किया जा सकता है। सी295 विमान पुराने पड़ चुके एंटोनोव एएन-32 और एचएएल के एवरो 748 विमानों की जगह लेगा। यह पुराने दोनों विमानों से तकनीक के मामले में बहुत आगे है।

इसे छोटे और कच्चे रनवे से उड़ाया जा सकता है। चीन के साथ लगी सीमा पर यह क्षमता काफी मायने रखती है। विमान 482 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ान भरता है। यह 9 टन सामान या 71 सैनिक अथवा 48 पैराट्रूपर्स को ले जा सकता है। यह विमान इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल इंटेलिजेंस की क्षमता भी रखता है।

2- ‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगा बढ़ावा
सी295 प्रोजेक्ट से भारत की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को बढ़ावा मिलेगा। इससे विदेश से आयात पर निर्भरता कम होगी और देश में निर्माण क्षमता को भी बढ़ावा मिलेगा। भारत ने एयरबस कंपनी से 56 सी295 विमान खरीदने का सौदा किया है। इसके अनुसार 16 विमान तैयार हालत में मिलेंगे। वहीं 40 विमानों का निर्माण वडोदरा की फैक्ट्री में होगा। वायुसेना को पांच सी295 विमान मिल चुके हैं। पहला सी295 विमान सितंबर 2023 में भारत आया था। भारत में बना पहला सी295 विमान सितंबर 2026 में वायुसेना को मिलने की उम्मीद है। अगस्त 2031 तक सभी विमान वायुसेना को मिल जाएंगे।

3- रोजगार व इकोसिस्टम को मिलेगा बढ़ावा
इस विमान परियोजना से रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। वडोदरा की इस यूनिट से एयरोस्पेस इंडस्ट्री में विविधता आने की उम्मीद है जो अभी बेंगलुरु, हैदराबाद और बेलगांव जैसे दक्षिण भारत में केंद्रित रही है।

यह यूनिट सीधे तौर पर 3000 से अधिक लोगों को नौकरी देगी। वहीं, 15,000 से ज्यादा अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होंगी।
प्रत्येक विमान की असेंबली के लिए टीएएसएल और उसके सप्लायर्स को 10 लाख से अधिक घंटे का काम मिलेगा जो कुशल वर्क फोर्स को बढ़ाएगा। साथ ही इंडस्ट्री से जुड़ी सहयोगी कंपनियों और सेवाओं को भी काम मिलेगा।

4-भारत में एयरोस्पेस इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ेगा
सी295 विमान बनाए जाने के साथ ही भारत में इसके रखरखाव के लिए भी इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार होगा। भारतीय वायुसेना के जवानों को सी295 विमान उड़ाने और इसे इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग दी जाएगी। स्पेयर पार्ट्स के लिए सप्लाई चेन तैयार होगी। भारत के सी295 बेड़े के विमान लगातार उड़ने की हालत में रहें, इसके लिए लंबे समय तक चलने वाले समझौते किए जाएंगे। इस परियोजना में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एक स्टिक होल्डिंग डिपो और आगरा में एयरफोर्स स्टेशन पर ट्रेनिंग केंद्र की स्थापना होगी। इससे भारत के उभरते नागरिक और सैन्य विमानन उद्योग को मदद मिलेगी, जिसमें अभी विदेशी कंपनियों जैसे बोइंग, एयरबस, एटीआर और सरकारी क्षेत्र की एचएएल का दबदबा है।

5- विमान निर्यात के अवसर भी मिलेंगे
सी295 परियोजना से भारत की घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ ही भविष्य में यहां से विमानों के निर्यात के अवसर भी मिलेंगे। वायुसेना के लिए 40 विमान बनाने के बाद एयरबस और टाटा कंपनी भारत सरकार से मंजूरी लेकर अन्य देशों से मिलने वाले ऑर्डर के लिए भी यहां विमान बनाएंगी। यह मेक इन इंडिया के साथ ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ पहल के अनुरूप है। इससे भारत को यूरोपीय और अमेरिकी वर्चस्व वाले एयरोस्पेस मार्केट में मजबूत खिलाड़ी के रूप में उतरने में मदद मिलेगी।

6 – सी295 बनाने वाली मूल कंपनी कौन है?
सी295 विमान मूल रूप से स्पेन की कंपनी ने बनाया था। बाद में यह कंपनी एयरबस का हिस्सा हो गई और अब इन विमानों को स्पेन की एयरबस यूनिट में बनाया जाता है।

7 – भारत ने कब की थी सी295 की डील?
भारत सरकार ने सितंबर 2021 में स्पेन की एयरबस डिफेंस एंड स्पेस कंपनी के साथ 56 सी295 विमानों की 21,935 करोड़ रुपये में डील की थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वडोदरा में सी295 एयरक्राफ्ट की फाइनल असेंबली लाइन प्लांट की नींव अक्टूबर 2022 में रखी थी।

8 – दुनिया के किन इलाकों में है यह विमान?
एयरबस के अनुसार सी295 दक्षिण अमेरिका में ब्राजील के जंगलों, कोलंबियाई पहाड़ों, मध्य पूर्व में अल्जीरिया और जॉर्डन के रेगिस्तान और यूरोप में पोलैंड और फिनलैंड के ठंडे मौसम में कामयाब है। यह विमान चाड, इराक और अफगानिस्तान में सैन्य अभियानों में भी उड़ान भर चुका है।

9 – सी295 विमान की खासियत क्या है?
छोटे रनवे पर शॉर्ट टेक-ऑफ और लैंडिंग कर सकते हैं। कंपनी के मुताबिक, ये 320 मीटर की दूरी में ही उड़ान भर सकते हैं। लैंडिंग के लिए 670 मीटर का रनवे काफी है। यानी लद्दाख, कश्मीर, असम और सिक्कि म जैसे पहाड़ी इलाकों में ऑपरेशन में ये विमान मददगार साबित होगा।

10 – 9,250 किलो का कुल पेलोड ले जा सकता है। इसमें 800 किलो के हथियार ले जा सकते हैं। एक बार में अपने साथ 71 सैनिक, 44 पैराट्रूपर्स, 24 स्ट्रेचर या 5 कार्गो पैलेट ले जा सकता है।

लगातार 11 घंटे तक उड़ान भर सकता है
दो लोगों के क्रू केबिन में टचस्क्रीन कंट्रोल के साथ स्मार्ट कंट्रोल सिस्टम भी है। विमान की लंबाई 80.3 फीट, विंगस्पैन 84.8 फीट, ऊंचाई 28.5 फीट है। इस ट्रांसपोर्ट विमान में पीछे रैंप डोर है, जो सैनिकों या सामान की तेजी से लोडिंग और ड्रॉपिंग के लिए बना है। विमान में पीडब्ल्यू 127 टर्बोट्रूप इंजन लगे हैं।

11- विमानों में होंगे इलेक्ट्रॉनिक वॉर सूट
सभी 56 विमानों को स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक वॉर सूट से लैस किया जाएगा जिसे भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और भारत डायनामिक्स लिमिटेड द्वारा डेवलप किया जाएगा। पूर्व रक्षा सचिव अजय कुमार ने कहा है कि विमान में स्वदेशी सामग्री भारत में अब तक की सबसे ज्यादा होगी और एयरबस स्पेन में विमान के उत्पादन के लिए जो 96 प्रतिशत काम करता है, वह वडोदरा में तैयार किया जाएगा।

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