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नए साल में नई तेजी से बढ़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था 2025-26 में 7.4 फीसदी जीडीपी से चौंकेगी दुनिया

The Indian economy will grow rapidly in the new year, with a GDP growth of 7.4% in 2025-26 surprising the world.

विनोद शील
नई दिल्ली। आम आदमी से लेकर कारोबार जगत तक, हर किसी के मन में यह सवाल रहता है कि आने वाला साल रोजगार, आमदनी और निवेश के लिहाज से कैसा रहेगा। भारत के विकास की स्पीड क्या रहने वाली है। इसी सवाल का उत्तर देती है राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की ताजा रिपोर्ट जो देश की आर्थिक तस्वीर को पूरी तरह साफ करती है। इसके अनुमान के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था करीब 7.4 प्रतिशत की मजबूत दर से आगे बढ़ सकती है जो पिछले साल की 6.5 प्रतिशत की वृद्धि से कहीं बेहतर मानी जा रही है।

यह रिपोर्ट देख कर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को भी धक्क ा लगेगा जिन्होंने 50 प्रतिशत टैरिफ लगा कर भारत पर दबाव बनाना चाहा और आलोचना करते हुए भारत की अर्थव्यवस्था को ‘डेड इकॉनमी’ होने का ढिंढोरा पीटने की कोशिश की थी। वे जहां-तहां भारत की इकॉनमी को कमजोर बताने का मौका नहीं चूकते लेकिन एनएसओ का यह आंकड़ा उन्हें एक तरह से आईना भी दिखाता है कि भारत सही राह पर चल रहा है। भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत दिख रही है और आरबीआई ने भी 7.3 प्रतिशत ग्रोथ का अनुमान जताया है। दावा है कि भारत की इस जोरदार ग्रोथ का मुख्य इंजन सर्विस सेक्टर रहेगा।

201.90 लाख करोड़ पहुंच सकती है वास्तविक जीडीपी
देश की नॉमिनल जीडीपी, जीवीए, सेक्टरवार ग्रोथ और निवेश के आंकड़े संकेत देते हैं कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है। नॉमिनल जीडीपी में लगभग 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की उम्मीद व्यक्त की गई है। यह रिपोर्ट बताती है कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत की विकास दर पिछले साल के मुकाबले बेहतर रहने वाली है और बाहरी दबावों का इस पर खास असर नहीं पड़ेगा। एनएसओ के अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की वास्तविक जीडीपी 201.90 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है जबकि वित्त वर्ष 2024-25 में इसका अनंतिम अनुमान 187.97 लाख करोड़ रुपये था। यह इशारा करता है कि अर्थव्यवस्था का आकार लगातार बढ़ रहा है। चालू कीमतों पर नॉमिनल जीडीपी के 2025-26 में बढ़कर 357.14 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है जबकि 2024-25 में यह 330.68 लाख करोड़ रुपये रही थी। नॉमिनल जीडीपी में मुद्रास्फीति शामिल होती है जबकि वास्तविक जीडीपी महंगाई के असर को हटाकर अर्थव्यवस्था की असली ग्रोथ दिखाती है।

जीवीए में भी दिखी मजबूती
एनएसओ के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में वास्तविक सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) 184.50 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है जो 2024-25 के 171.87 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है।

इ ससे जीवीए में 7.3 प्रतिशत की वृद्धि दर का संकेत मिलता है। नाममात्र सकल बाजार मूल्य (जीवीएसी) के 323.48 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है जो पिछले वित्त वर्ष के 300.22 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। इसमें करीब 7.7 प्रतिशत की बढ़त देखी जा सकती है। जीवीए के आंकड़ों से साफ है कि अर्थव्यवस्था के विभिन्न सेक्टरों में उत्पादन और सेवाओं का योगदान लगातार बढ़ रहा है।

कौन-सा सेक्टर बनेगा ग्रोथ का इंजन?
इस आर्थिक मजबूती के पीछे सबसे बड़ा योगदान सर्विस सेक्टर का है। बैंकिंग, रियल एस्टेट और प्रोफेशनल सर्विसेज जैसे क्षेत्रों में 9.9 प्रतिशत की भारी वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। इसके साथ ही होटल, परिवहन और संचार जैसी सेवाओं में भी 7.5 प्रतिशत की दर से सुधार होने की आशा है जो देश के सेवा क्षेत्र की बढ़ती ताकत को दर्शाता है। कुल मिलाकर, सर्विस सेक्टर, विशेषकर बैंकिंग और पर्यटन, देश की अर्थव्यवस्था को गति देने वाला मुख्य इंजन बना हुआ है।

इंडस्ट्री और मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर भी पीछे नहीं हैं। मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन गतिविधियों में लगभग 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान है जिससे रोजगार के अवसर बढ़ने और निवेश को बल मिलने की उम्मीद है। दूसरी ओर खेती और उससे जुड़े क्षेत्रों में लगभग 3.1 प्रतिशत की मध्यम गति से विकास होने का अनुमान लगाया गया है। बिजली, गैस, पानी और अन्य उपयोगिता सेवाओं में भी करीब 2.1 प्रतिशत की वृद्धि देखी जा सकती है।

खपत करने वाले लोग बढ़ाएंगे रफ्तार
खपत और निवेश के मोर्चे पर भी तस्वीर सकारात्मक नजर आती है। लोगों के खर्च करने की क्षमता बढ़ने से निजी उपभोग में लगभग 7 प्रतिशत की बढ़त का अनुमान है। वहीं मशीनरी, भवन और इंफ्रास्ट्रक्चर में होने वाला निवेश यानी स्थायी पूंजी निर्माण लगभग 7.8 प्रतिशत तक बढ़ सकता है जो पिछले साल से बेहतर संकेत देता है। इसका मतलब यह है कि कंपनियां भविष्य को लेकर भरोसे के साथ विस्तार की योजना बना रही हैं।

आरबीआई की रिपोर्ट में भी उभरी यही तस्वीर
भारतीय रिजर्व बैंक ने भी हालिया मौद्रिक नीति समीक्षा में लगभग इसी तरह की तस्वीर पेश की है। आरबीआई का मानना है कि 2025-26 में जीडीपी करीब 7.3 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है। केंद्रीय बैंक के मुताबिक त्योहारों के दौरान खर्च और जीएसटी में सुधारों से घरेलू मांग को सहारा मिला है। गांवों में मांग मजबूत बनी हुई है और शहरों में भी धीरे-धीरे सुधार दिख रहा है। बैंक ऋण में बढ़ोतरी और उद्योगों में क्षमता का बेहतर उपयोग निवेश को गति दे रहा है। हालांकि वैश्विक मांग कमजोर होने से निर्यात पर कुछ दबाव जरूर देखा गया है।

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि खेती को अच्छी खरीफ फसल, जलाशयों में पर्याप्त पानी और रबी की बेहतर बुआई से सहारा मिल रहा है। मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में सुधार जारी है और सेवा क्षेत्र स्थिर गति से आगे बढ़ रहा है। आने वाले समय में कम महंगाई, कंपनियों और बैंकों की मजबूत वित्तीय स्थिति और अनुकूल मौद्रिक माहौल भी अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाले कारक रहेंगे।

वैश्विक चुनौतियों के बावजूद बुनियाद मजबूत
भविष्य की ओर देखें तो देश के अंदर सुधारों की निरंतरता, कृषि की सकारात्मक संभावनाएं और खपत में सुधार आर्थिक विकास को सहारा देंगे। विदेशों से जुड़ी अनिश्चितताएं जरूर एक जोखिम बनी रहेंगी पर सर्विस एक्सपोर्ट के टिके रहने और व्यापार समझौतों में प्रगति से नए अवसर भी बन सकते हैं। आरबीआई के अनुमान के अनुसार अगले साल की अलग-अलग तिमाहियों में विकास दर संतुलित बनी रह सकती है और जोखिम फिलहाल संतुलन की स्थिति में है। कुल मिलाकर तस्वीर यही संकेत देती है कि भारत की अर्थव्यवस्था आने वाले समय में स्थिरता और मजबूती के साथ आगे बढ़ने की राह पर है।

एनएसओ के ये अग्रिम अनुमान बताते हैं कि भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक चुनौतियों के बावजूद मजबूत बुनियाद पर आगे बढ़ रही है। सेवा क्षेत्र की मजबूती, निवेश में बढ़ोतरी और स्थिर घरेलू मांग भारत को दुनिया की तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में बनाए रखने में मदद कर सकती है। अगर मौजूदा रफ्तार बरकरार रहती है तो वित्त वर्ष 2025-26 भारत के लिए आर्थिक दृष्टि से एक और मजबूत साल साबित हो सकता है।

भारत के लिए ‘गोल्डीलॉक्स मोमेंट’
गोल्डीलॉक्स मोमेंट’ एक ऐसी आदर्श आर्थिक स्थिति है जहां मजबूत जीडीपी ग्रोथ के साथ-साथ महंगाई कम और स्थिर रहती है, ब्याज दरें अनुकूल होती हैं और रोजगार के हालात सुधरते हैं । यह एक ‘न ज्यादा गर्म, न ज्यादा ठंडा’ वाला संतुलन है, जो भारत वर्तमान में अनुभव कर रहा है, जिससे निवेश और आर्थिक स्थिरता बढ़ रही है। यह स्थिति पिछले कुछ समय से बनी हुई है और उम्मीद है कि 2026-27 तक जारी रहेगी, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनी रहेगी, जैसा कि हालिया रिपोर्ट्स और सरकारी बयानों से पता चलता है।

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