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नगर निगम की पहल ने बदली गोरखपुर शहर की सूरत

The initiative of the Municipal Corporation changed the face of Gorakhpur city.
ब्लिट्ज ब्यूरो

गोरखपुर। बेकार समझी जाने वाली अनुपयोगी वस्तुएं, जैसे पुराने टायर, धातु के स्क्रैप, और प्लास्टिक के सामान, अब मूर्तिकला के अद्भुत नमूनों में परिवर्तित हो चुके हैं। नगर निगम द्वारा बनाई गईं ये कलाकृतियां न सिर्फ कलात्मक रूप से सुंदर हैं, बल्कि पर्यावरणीय जागरूकता का एक सशक्त संदेश भी दे रही हैं।
शहर के प्रमुख मार्गों के किनारे और फुटपाथों पर स्थापित ये स्थापत्य कलाकृतियां राहगीरों का ध्यान बरबस ही अपनी ओर खींच लेती हैं। ‘वेस्ट टू वंडर’ योजना के तहत नगर निगम द्वारा कबाड़ से बनाई गई कलाकृतियों ने शहर की सुंदरता में चार चांद लगा दिए हैं। प्रदर्शित की गई कलाकृतियों में विविधता देखते ही बनती है। जिलाधिकारी आवास के सामने पुराने टिन को नया जीवन देते हुए उनसे गढ़ी गई मानव आकृतियां जीवंत प्रतीत होती हैं।
इसी तरह, कार्मल रोड पर बेकार पड़े टायरों को रंग-बिरंगे और आकर्षक रूपों में ढालकर बनाई गई कलाकृतियां भी मन मोह रही हैं। इसी तरह नगर निगम परिसर में भी टायरों से बनी कलाकृतियां आकर्षण का केंद्र बन रही हैं। सड़क किनारे और फुटपाथों पर स्थापित की गई ये अनूठी रचनाएं राहगीरों को रुकने और इन्हें निहारने पर मजबूर कर रही हैं।
शहर के लोगों ने निगम के इस प्रयास की जमकर सराहना की है। बेतियाहाता के संजय सिंह, रुस्तमपुर के अशोक अग्रहरि ने कहा कि यह एक बेहतरीन पहल है। पहले जहां गंदगी का अंबार होता था, वहां अब कला का प्रदर्शन हो रहा है। यह देखकर बहुत अच्छा लगता है कि बेकार चीजों से भी इतनी खूबसूरत चीजें बनाई जा सकती हैं।
परियोजना का संदेश
इस परियोजना से यह संदेश भी जा रहा है कि कचरा सिर्फ एक समस्या नहीं, बल्कि रचनात्मकता का एक स्रोत हो सकता है। इन कलाकृतियों ने न केवल शहर के सौंदर्यीकरण में योगदान दिया है, बल्कि एक महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश भी प्रसारित किया है, जो सभी को पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी का एहसास कराता है।
-दुर्गेश मिश्रा, अपर नगर आयुक्त।

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