राजेश दुबे
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मुद्दे पर राज्यों की लापरवाही को लेकर नाराजगी जताई है। आवारा कुत्तों की नसबंदी (स्टरलाइजेशन) बढ़ाने संबंधी अपने निर्देशों का राज्यों में पालन न किए जाने पर कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकारें जमीनी काम करने के बजाय सिर्फ बातें कर रही हैं और हवा में महल बना रही हैं।
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा कि राज्यों ने कोर्ट के आदेशों का ठीक से पालन नहीं किया है। कोर्ट का कहना है कि कई राज्यों ने सिर्फ कागजों में रिपोर्ट दी है, लेकिन असल में काम नहीं हुआ। मामले में नियुक्त एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल ने विभिन्न राज्यों में उठाए गए कदमों का सार प्रस्तुत किया और साथ ही कमियों की ओर इशारा किया।
कोर्ट ने बताया कि राज्यों को ये
एक्शन लेना थे:
आवारा कुत्तों की नसबंदी बढ़ानी थी
एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर (एबीसी) बढ़ाने थे
कुत्तों के लिए शेल्टर बनाने थे
स्कूल, अस्पताल जैसे इलाकों में बाड़ लगानी थी
सड़कों और हाईवे से आवारा जानवर हटाने थे।
बिहार पर सवाल
कोर्ट में बताया गया कि बिहार में 34 एबीसी केंद्र हैं और करीब 20 हजार कुत्तों की नसबंदी हुई है लेकिन कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य में 6 लाख से ज्यादा कुत्ते हैं, तो यह संख्या बहुत कम है।
यह भी साफ नहीं बताया गया कि हर दिन कितने कुत्तों की नसबंदी होती है और कितने इलाकों में बाड़ लगी है।
कुत्तों के काटने के आंकड़े नहीं
कोर्ट ने कहा कि असम को छोड़कर किसी भी राज्य ने यह नहीं बताया कि कितने लोग कुत्तों के काटने से घायल हुए। असम के आंकड़े देखकर कोर्ट हैरान रह गया। जहां 2024 में 1.66 लाख लोग कुत्तों के काटने का शिकार हुए वहीं 2025 में सिर्फ जनवरी में 20,900 मामले आ गए। कोर्ट ने इसे बहुत चिंताजनक बताया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब वह राज्यों के अस्पष्ट और अधूरे जवाब स्वीकार नहीं करेगा। जस्टिस नाथ ने चेतावनी दी कि जो राज्य साफ जानकारी नहीं देंगे, उनके खिलाफ कड़ी टिप्पणी की जाएगी। कोर्ट ने गोवा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, झारखंड और गुजरात की दलीलें भी सुनीं।
स्कूल और अस्पताल अब भी असुरक्षित
कोर्ट ने कहा कि कई स्कूलों, अस्पतालों और सरकारी इमारतों में अब भी बाड़ नहीं लगी है। कोर्ट के मुताबिक हर सार्वजनिक इमारत की घेराबंदी होनी चाहिए। ताकि बच्चों और मरीजों की सुरक्षा हो, आवारा जानवर अंदर न आ सकें, सरकारी संपत्ति सुरक्षित रहे। पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना की रिपोर्ट पर सुनवाई होगी।

