ब्लिट्ज ब्यूरो
रियाद। पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर के इस्लामिक नाटो बनाने का सपना शुरू होते ही टूटता नजर आ रहा है। तुर्की ने पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए रक्षा समझौते का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया है। मीडिया ने सऊदी सेना के एक करीबी सूत्र के हवाले से बताया कि तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रक्षा समझौते में शामिल नहीं होगा। इससे पहले जनवरी की शुरुआत में तुर्की के एक अधिकारी ने कहा था कि वे इस गठबंधन में शामिल होने के मकसद से बातचीत कर रहे हैं। पाकिस्तान में तुर्की के शामिल होने की संभावना के चलते इसे रक्षा समझौते को ‘मुस्लिम दुनिया का नाटो’ कहा जाने लगा था।
द्विपक्षीय ही रहेगा समझौता
सूत्र ने बताया कि तुर्की पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौते में शामिल नहीं होगा। इसने बातचीत की खबरों को भी खारिज कर दिया। सऊदी सूत्र ने कहा, यह पाकिस्तान के साथ एक द्विपक्षीय समझौता है और यह द्विपक्षीय समझौता ही रहेगा। एक खाड़ी अधिकारी ने भी इस जानकारी की पुष्टि की है।
नाटो जैसा गठबंधन बनाने की कोशिश
ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच तीनों मुस्लिम देश नाटो की तरह एक शक्तिशाली गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहे थे। पिछले साल दोहा में हमास के नेताओं को निशाना बनाकर किए गए इजरायली हवाई हमलों के बाद खाड़ी देशों में सुरक्षा चिंता बढ़ गई थी। इसके अलावा ईरान ने कतर में एक अमेरिकी बेस पर मिसाइल हमला किया था।
पाकिस्तान-सऊदी रक्षा समझौता
पाकिस्तान और सऊदी अरब ने पिछले साल सितम्बर में ऐतिहासिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसमें कहा गया कि किसी एक देश पर कोई हमला दोनों देशों पर आक्रमण माना जाएगा। यह समझौता मई 2025 की शुरुआत में पाकिस्तान के भारत के सात चार दिनों तक चले भीषण संघर्ष के बाद हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार, माना जाता है कि सऊदी अरब ने टकराव को शांत करने में अहम भूमिका निभाई है।
पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच पिछले साल घोषित रक्षा समझौते ने कई सवाल खड़े किए हैं। सबसे महत्वपूर्ण पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को लेकर था कि क्या अब सऊदी अरब को इस तक पहुंच मिल गई है। पाकिस्तान ने शुरुआत में बड़बोलापन दिखाया लेकिन बाद में कहा कि परमाणु हथियार इसका हिस्सा नहीं हैं।

