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भीषण ठंड और गलन में भी सैलानियों से गुलजार बनारस

Varanasi is bustling with tourists even in the severe cold and melting snow.
ब्लिट्ज ब्यूरो

वाराणसी। बनारस की तासीर ही कुछ ऐसी है कि यहां मौसम की मार पर आस्था और उत्साह हमेशा भारी पड़ता है। धर्मनगरी काशी में इस समय भीषण ठंड और बर्फीली गलन का दौर जारी है, लेकिन इसके बावजूद सैलानियों के कदम नहीं ठिठके हैं। विगत दिवस वाराणसी का नजारा कुछ ऐसा था कि आसमान में बादलों के डेरे के कारण सूर्यदेव के दर्शन तक नहीं हुए, लेकिन गंगा की लहरों पर पर्यटकों का मेला लगा रहा।
विगत दिवस सुबह से ही पूरा शहर घने कोहरे और सर्द हवाओं की चपेट में रहा। दिन का पारा लुढ़कने और गलन बढ़ने के कारण स्थानीय लोग घरों में दुबके रहे, लेकिन घाटों पर नजारा इसके उलट था। दशाश्वमेध घाट से लेकर अस्सी घाट तक, हर तरफ सैलानियों की भीड़ उमड़ती रही। पर्यटकों के लिए गंगा की लहरों पर नौका विहार का आकर्षण इतना प्रबल था कि कड़ाके की ठंड भी उनके उत्साह के आड़े नहीं आ सकी।
गंगा में नावों का रेला, क्रूज का भी क्रेज
वाराणसी के घाटों के सामने गंगा की मुख्य धारा में जिधर भी नजर गई, उधर केवल पर्यटकों से भरी नावें ही नावें दिखाई दीं। विदेशी सैलानियों के साथ-साथ देश के कोने-कोने से आए पर्यटकों ने नावों पर सवार होकर काशी के अर्धचंद्राकार घाटों की खूबसूरती को निहारा।
आधुनिक सुविधाओं के शौकीन पर्यटकों ने हाइड्रोजनचालित और इलेक्टि्रक क्रूज का आनंद लिया। क्रूज की बंद खिड़कियों के पीछे से घाटों को निहारना पर्यटकों के लिए ठंड से बचने और सैर करने का एक सुरक्षित जरिया बना रहा।
साइबेरियन पक्षियों का साथ व चाय की चुस्की
ठंड के इस मौसम में गंगा की सैर को और भी खुशनुमा बना रहे हैं सात समंदर पार से आए साइबेरियन पक्षी। पर्यटक नावों से इन मेहमान पक्षियों को दाना खिलाते और उनके साथ तस्वीरें खिंचवाते नजर आए। घाटों के किनारे सजी चाय की दुकानों और चाट की गलियों में भी सुबह से शाम तक भारी भीड़ देखी गई। कुल्हड़ वाली गरम चाय और बनारसी कचौड़ी का लुत्फ उठाते हुए पर्यटक इस कड़कड़ाती ठंड का जश्न मनाते दिखे।
पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि नववर्ष पर पर्यटकों की यह आमद अभी और बढ़ने वाली है। प्रशासन ने भी सुरक्षा के मद्देनजर घाटों पर जल पुलिस और एसडीआरएफ की तैनाती बढ़ा दी है ताकि कोहरे के बीच नौका विहार सुरक्षित बना रहे।
पौष की ठंड ने कंपकंपाया
विदा होने से एक सप्ताह पहले पौष माह की ठंड ने लोगों कंपकंपा दिया। दिन में करीब सात किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली पछुआ हवा के चलते तापमान 13.5 डिग्री सेल्सियस से ऊपर नहीं जा सका। न्यूनतम तापमान 8.8 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया। मौसम विभाग के अनुसार बनारस और गाजीपुर प्रदेश के दूसरे सबसे सर्द जनपद रहे, जबकि पहले स्थान पर हरदोई और शाहजहांपुर रहे। इन दोनों जनपदों में अधिकतम तापमान 12.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
बनारस में कोल्ड डे
पूर्वानुमान के मुताबिक आगामी चार से पांच दिनों तक मौसम का मिजाज ऐसे ही बना रहेगा। इसे देखते हुए कोल्ड डे का अलर्ट जारी किया गया। मौसम वैज्ञानिक प्रो. मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि ला-नीना के प्रभाव के कारण इन दिनों पछुआ हवा की रफ्तार सुबह और शाम के समय बढ़ रही है। पश्चिमी विक्षोभ के गुजरने के बाद पहाड़ी इलाकों में हो रही बर्फबारी का असर पछुआ हवाओं के साथ मैदानी क्षेत्रों में भी दिखाई दे रहा है। ठंडी हवा से सुबह और शाम घना कोहरा हो रहा है। इससे पहले वर्ष 2019 में 28 दिसंबर को अधिकतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। वहीं 25 दिसंबर 2012 को अधिकतम तापमान 13.3 डिग्री और 30 दिसंबर 2003 को 13.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था।मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार पछुआ हवा के कारण वातावरण में नमी का स्तर बढ़ गया है, जिससे कोहरा और गलन का असर और तेज हो गया है। रविवार को नमी का स्तर करीब 93 प्रतिशत दर्ज किया गया।
क्या होता है कोल्ड डे
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मैदानी इलाकों में जब अधिकतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस या उससे नीचे और न्यूनतम तापमान आठ डिग्री सेल्सियस या उससे नीचे पहुंच जाता है, तब शीत दिवस यानी कोल्ड डे की स्थिति बन जाती है।
जेट स्ट्रीम की सक्रियता के कारण वातावरण में कोहरे का प्रभाव बना रहता है। जेट स्ट्रीम ऊपरी वायुमंडल में पश्चिम से पूर्व दिशा की ओर बहने वाली तेज गति की संकरी और घुमावदार हवा की धाराएं होती हैं, जो पृथ्वी के चारों ओर फैलकर मौसम के पैटर्न को प्रभावित करती हैं।

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