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नोएडा में अब कचरे से बनेंगे जल, ऊर्जा और खाद

Water, energy and fertilizer will now be made from waste in Noida
ब्लिट्ज ब्यूरो

नोएडा। उत्तर प्रदेश की नोएडा अथॉरिटी वैज्ञानिक तरीके से कचरा निस्तारण के लिए अपना पहला एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र स्थापित करेगी। इस संयंत्र की शुरुआती क्षमता 300 टीपीडी होगी, जिसे आगे चलकर 500 टीपीडी तक बढ़ाया जाएगा। यहां कचरे से पानी, बिजली और जैविक खाद (कंपोस्ट) तैयार की जाएगी।
नोएडा अथॉरिटी की बोर्ड बैठक में चेयरमैन दीपक कुमार ने परियोजना को मंजूरी दे दी। संयंत्र शुरू होने पर गीले और सूखे कचरे का निस्तारण एक ही स्थान पर किया जाएगा। यह प्लांट सेक्टर-145 में 19.5 एकड़ भूमि या ग्रेटर नोएडा के अस्तौली में 16.66 एकड़ जमीन पर प्रस्तावित केंद्र में लगाया जाएगा। इसके लिए अथॉरिटी 30 एकड़ भूमि 64 करोड़ रुपये में खरीदेगा।
जानकारी के अनुसार, वर्तमान में नोएडा से प्रतिदिन लगभग 1200 मीट्रिक टन कचरा एकत्र होता है, जो भविष्य में 1500 टीपीडी तक बढ़ने की संभावना है। एनटीपीसी विद्युत व्यापार निगम लिमिटेड के साथ 600 टीपीडी कचरे के निस्तारण के लिए अनुबंध किया गया है। फिलहाल संयंत्र निर्माण का 40 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। इसके अतिरिक्त, 40 टीपीडी क्षमता वाले छह विकेंद्रीकृत एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र भी लगाए जाएंगे, जिनकी कुल क्षमता 240 टीपीडी होगी।
सीईओ ने दी जानकारी
नोएडा अथॉरिटी के सीईओ डॉ. लोकेश एम के अनुसार, नोएडा में उत्पन्न कचरे से एक साथ तीन प्रकार के उत्पाद तैयार किए जाएंगे। बायोगैस से बिजली, कंपोस्ट और पानी। यह पानी वाहन धुलाई, निर्माण कार्य और सिंचाई जैसे उपयोग में काम आएगा। गोवा में इसी तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जहां प्लांट में कचरे से जैविक तत्वों को अलग कर बायोगैस में परिवर्तित किया जाता है। यह बायोगैस बिजली उत्पादन में सहायक होती है। रेस्टोरेंट्स से निकलने वाले गीले कचरे को मीथेन युक्त बायोगैस जैसे उपयोगी बायो-प्रोडक्ट में बदला जाता है, जबकि सूखे कचरे से पुनर्चक्रण योग्य सामग्री प्राप्त होती है। इस प्लांट में प्रतिदिन 300 मीट्रिक टन कचरे का इसी तकनीक से निस्तारण किया जाएगा, जिससे पानी भी उत्पन्न होगा।
इसके साथ ही प्लांट से प्रतिदिन करीब 7 से 8 टन खाद भी तैयार होगी। अधिकारी ने बताया कि इस तकनीक से गीले और सूखे कचरे के निस्तारण के दौरान लिचेट नामक गंदा पानी उत्पन्न होता है, जिसे शोधित कर पुन: उपयोग में लाया जा सकता है। प्राधिकरण इस पानी का इस्तेमाल करेगा और इसके लिए एक एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) इंटीग्रेटेड सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के साथ ही स्थापित किया जाएगा, जहां इस लिचेट का शोधन किया जाएगा।
पीपीपी मॉडल पर स्थापित होगा
एक अनुमान के मुताबिक, 100 टन कचरे से रोजाना लगभग 2 टन पानी तैयार किया जा सकता है, जिसका उपयोग वाहन धुलाई, सिंचाई और निर्माण कार्यों में किया जाएगा। अस्तौली या सेक्टर-145 में बनने वाला यह प्लांट पीपीपी मॉडल पर स्थापित होगा, जिसमें कंपनी बिजली, कंपोस्ट और पानी बेचकर खर्च वहन करेगी और संयंत्र का संचालन करेगी। अनुबंध अवधि पूरी होने पर यह प्लांट प्राधिकरण को सौंप दिया जाएगा।

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