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क्या यूपी में भी खत्म हो जाएगी पांचवीं और आठवीं में फेल न करने की नीति

ब्लिट्ज ब्यूरो

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार की नो डिटेंशन पॉलिसी पर चर्चा शुरू हो गई है। आठवीं कक्षा तक के लिए यह पॉलिसी लागू है। इस नीति के तहत आठवीं कक्षा तक के छात्रों को फेल न किए जाने की नीति लागू है। बेसिक शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि प्रदेश ने शिक्षा के अधिकार अधिनियम को लागू किया है। आरटीई अधिनियम के तहत आठवीं कक्षा तक के छात्रों को कक्षा में अंकों के आधार पर न रोकने की नीति है। इसको लेकर प्रावधान बनाए गए हैं। इसे सरकार की नीतियों में शामिल किया गया। पांचवीं और आठवीं के स्टूडेंट्स की परीक्षाएं होती हैं लेकिन उन्हें अगली कक्षा में प्रमोशन से नहीं रोका जाता है। अब, केंद्र की नई अधिसूचना के आधार पर योगी आदित्यनाथ सरकार उच्च स्तर पर मंथन के बाद फैसला ले सकती है।

केंद्र सरकार ने बदली है नीति
शिक्षा का अधिकार कानून से इतर केंद्र सरकार ने आठवीं कक्षा तक नो डिटेंशन नीति में बदलाव कर दिया है। साथ ही, शिक्षा मंत्रालय की ओर से साफ किया गया है कि सीबीएसई स्कूल जिस राज्य में हैं, वहां की पॉलिसी इन स्कूलों पर लागू होगी। इसका अर्थ यह हुआ कि यूपी के सीबीएसई स्कूलों में यूपी सरकार की पॉलिसी को लागू किया जाएगा। अगर सरकार नो डिटेंशन पॉलिसी को बरकरार रखती है तो प्रदेश के सीबीएसई स्कूलों में यह नीति जारी रहेगी।

क्यों लिया गया निर्णय?
शिक्षा का अधिकार कानून के जरिए आठवीं कक्षा तक के छात्रों को परीक्षा से तो गुजरना होता है लेकिन उन्हें पास अंक से कम आने पर भी कक्षा में रोकने का प्रावधान नहीं है। इससे कमजोर छात्र भी अगली कक्षाओं में प्रमोट हो रहे थे। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की नीति से पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। छात्रों में प्रतिस्पर्धा की भावना में कमी आ रही है। इस प्रकार की स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने अपनी नीतियों में बदलाव कर दिया है। असम, बिहार, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, मध्य प्रदेश, मेघालय, नगालैंड, पंजाब, राजस्थान, सिक्कि म, तमिलनाडु, त्रिपुरा, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, दिल्ली और दादर एंड नगर हवेली जैसे राज्यों में नो डिटेंशन नीति को पहले ही खत्म कर दिया गया है। अब देश के सबसे बड़े राज्य पर हर किसी की नजर है।

पांचवीं और आठवीं की परीक्षा में खराब प्रदर्शन या फेल करने वाले छात्रों को कक्षा में रोकने संबंधी निर्णय बेसिक शिक्षा विभाग के स्तर पर लिए जाएंगे। इस संबंध में जल्द ही बैठकों की शुरुआत का दावा किया जा रहा है। बेसिक शिक्षा विभाग के स्तर पर नो डिटेंशन पॉलिसी को खत्म करने का निर्णय लिया जाता है तो प्रदेश की सभी सरकारी और निजी स्कूलों पर एक साथ लागू होगा।

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