संजय द्विवेदी
लखनऊ। योगी आदित्यनाथ की सरकार प्रदेश के धर्मक्षेत्रों और अर्थक्षेत्रों को संवारने पर विशेष ध्यान दे रही है। इन जगहों की कनेक्टिविटी ठीक करने और उन्हें सड़कों से जोड़ने के लिए अलग से कार्ययोजना तैयार की गई है। जिन धर्मस्थलों पर सालाना पांच लाख से अधिक श्रद्धालु या पर्यटक पहुंचते हैं, उनकी विशेष तौर पर रोड क्नेक्टिविटी बढ़ाई जाएगी।
– पर्यटन की दृष्टि से तय किए गए 12 सर्किट
प्रदेश में पर्यटन की दृष्टि से 12 सर्किट तय किए गए हैं। इसमें रामायण सर्किट, सूफी सर्किट, कृष्ण सर्किट, बुद्ध सर्किट, जैन सर्किट, शक्ति पीठ सर्किट, आध्यात्मिक सर्किट, महाभारत सर्किट, बुंदेलखंड सर्किट, इको पर्यटन सर्किट और शिल्प सर्किट शामिल किए गए हैं। पीडब्ल्यूडी ने इनकी कनेक्टिविटी के लिए अलग से कार्ययोजना बनाई है।
32 मार्ग चिह्नित किए गए
योजना के तहत उन धर्मस्थलों या पर्यटन स्थलों को प्राथमिकता दी जा रही है जो किसी राष्ट्रीय या राज्य हाइवे से नहीं जुड़े हैं। इन धर्मस्थलों को संपर्क मार्ग के जरिए हाइवे से कनेक्ट किया जाएगा। जहां सड़कें संकरी हैं, उनका चौड़ीकरण भी होगा। पहले प्राथमिकता उन मार्गों को दी जा रही है जिनके चौड़ीकरण या निर्माण में भूमि अधिग्रहण की जरूरत नहीं है। मार्गों के चयन के लिए पीडब्ल्यूडी ने धर्मार्थ कार्य विभाग से प्रस्ताव मांगा था।
एक अधिकारी ने बताया कि पहले चरण में 19 मार्गों के लिए कार्ययोजना मिली है जिस पर लगभग 577 करोड़ रुपये खर्च होंगे। दूसरे चरण में 13 सड़कों के लिए 462 करोड़ की कार्ययोजना मिली है। इसकी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इस तरह अब तक 1039 करोड़ रुपये की कार्ययोजना पर काम आगे बढ़ाया गया है।
फोर लेन से जुड़ेंगे औद्योगिक क्लस्टर
आस्था के साथ प्रदेश का अर्थ पथ भी सुगम हो इस पर भी सरकार का ध्यान है। इसलिए औद्योगिक पार्क सहित अन्य इंडस्टि्रयल एरिया की कनेक्टिविटी को अलग से अजेंडे में रखा गया है। इसमें उन मार्गों का ही चयन किया जाता है जिसके लिए औद्योगिक विभाग प्रस्ताव भेजता है। इसके तहत सभी महत्वपूर्ण औद्योगिक क्लस्टर को फोर लेने से जोड़ा जाएगा। वहीं, एमएसएमई विभाग के अंतर्गत छोटी इकाइयों को बढ़ाने के लिए प्लेज पार्क बनाए जा रहे हैं।
यहां तक पहुंचने के लिए भी कम से कम दो लेन की कनेक्टिविटी विकसित की जाएगी। जहां निजी छोटे उद्योग या एकल इकाइयां हैं, उन तक भी एक या डेढ़ लेन की सड़क के जरिए पहुंच मार्ग बनाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। पिछड़े क्षेत्रों और आकांक्षी जिलों को इसमें विशेष प्राथमिकता दी जाएगी।

