ब्लिट्ज ब्यूरो
नई दिल्ली। हॉलीवुड सुपरस्टार टॉम क्रूज 63 की उम्र में ‘गवर्नर्स अवॉर्ड्स’ (मानद ऑस्कर) से सम्मानित हुए हैं। उनके इतने लंबे सफर की कुछ बातें खास हैं। बकौल टॉम क्रूज जब मैंने फिल्मों में कदम रखा, तो मेरे लिए यह कभी ऐसा नहीं था कि ‘चलो एक फिल्म बना लेते हैं’। मेरे लिए फिल्में हमेशा खोज से भरा सफर रही हैं। दुनिया की, किरदारों की, इंसानी भावनाओं की और अपने अंदर छिपी संभावनाओं की खोज का जरिया।
उन्होंने कहा कि बचपन में कमरे की दीवार पर अपने सपनों को लिखकर चिपकाता था। खुद को रोज याद दिलाता था कि अगर अपनी जिंदगी का रास्ता बनाना है, तो उसमें पूरी जान झोंकनी होगी। जब फिल्मों में आया, तो मैंने खुद से वादा किया कि सिर्फ वही कहानियां करूंगा जिनमें अपना दिल लगा सकूं। सिर्फ वही सीन शूट करूंगा जिनमें सच्चाई झलके। कुछ ठीक न लगे, तो उसे करने से पीछे हटूंगा क्योंकि मेरे लिए सिनेमा केवल मनोरंजन नहीं है। यह इंसान और इंसान के बीच की सबसे शुद्ध बातचीत है। एक अच्छी फिल्म आपको हंसाती है, रुलाती है, हिलाती है… लेकिन सबसे खास तो यह है कि वो आपको बदल सकती है। मेरे करियर में कई जोखिम आए, लगा यह फिल्म नहीं चलेगी, यह फैसला गलत है। अंदर आवाज उठती थी कि आसान होता, तो कोई मतलब नहीं होता। सफलता का स्वाद तभी गहरा है जब उसके लिए संघर्ष किया हो, असफलताओं को झेला हो, फिर भी अपने सपने से हाथ न हटाया हो। अपने सपनों को हल्के में मत लें। जो सपने देखते हैं, उन्हें साकार करें। आपका जुनून आपके डर से बड़ा होना चाहिए।

