• Latest
nobel

साहित्य, शांति व अर्थशास्त्र का नोबेल

October 18, 2024
India showcases its military might at Kartavya Path

India showcases its military might at Kartavya Path

January 26, 2026
Operation Sindoor takes centre stage at Republic Day parade

Operation Sindoor takes centre stage at Republic Day parade

January 26, 2026
who

US exits WHO

January 26, 2026
Trilateral talks

Trilateral talks

January 26, 2026
Starmer

APPALLING

January 26, 2026
Cardinal concern

Cardinal concern

January 26, 2026
Nod for deep-sea MINING

Nod for deep-sea MINING

January 26, 2026
Call for justice

Call for justice

January 26, 2026
Scrapping H-1B visa lottery

New H-1B rule

January 26, 2026
Danish PM urges NATO presence in Arctic region

Danish PM urges NATO presence in Arctic region

January 26, 2026
Keir Starmer

Starmer appoints Chandra as special envoy to the US

January 26, 2026
UK drops foreign student targets

UK drops foreign student targets

January 26, 2026
Blitzindiamedia
  • Blitz Highlights
    • Special
    • Spotlight
    • Insight
    • Education
    • Health
    • Sports
    • Entertainment
  • Opinion
  • Legal
  • Perspective
  • Nation
    • East
    • West
    • North
    • South
  • Business & Economy
  • World
  • Hindi Edition
  • International Editions
    • US (New York)
    • UK (London)
    • Middle East (Dubai)
    • Tanzania (Africa)
  • Blitz India Business
No Result
View All Result
  • Blitz Highlights
    • Special
    • Spotlight
    • Insight
    • Education
    • Health
    • Sports
    • Entertainment
  • Opinion
  • Legal
  • Perspective
  • Nation
    • East
    • West
    • North
    • South
  • Business & Economy
  • World
  • Hindi Edition
  • International Editions
    • US (New York)
    • UK (London)
    • Middle East (Dubai)
    • Tanzania (Africa)
  • Blitz India Business
No Result
View All Result
World's first weekly chronicle of development news
No Result
View All Result

साहित्य, शांति व अर्थशास्त्र का नोबेल

मानव जीवन को उकेरने वाले गद्य के लिए कोरियाई लेखिका को सर्वोच्च सम्मान हान कांग ने शरीर व आत्मा के बीच संबंधों पर लेखन में हासिल की है महारथ

by Blitz India Media
October 18, 2024
in Hindi Edition
nobel

स्टॉकहोम। दक्षिण कोरिया की लेखिका हान कांग को 2024 का साहित्य का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया है। उन्हें यह पुरस्कार उनके गहन काव्यात्मक गद्य के लिए प्रदान किया गया है। नोबेल समिति ने उनके लेखन को ऐतिहासिक आघातों व मानव जीवन की नाजुकता को उजागर करने वाला गहन काव्यात्मक गद्य बताया है।

hong
अकादमी ने कहा कि शरीर और आत्मा, जीवित और मृत के बीच संबंधों पर लेखन में उनको महारथ हासिल है व इसके बारे में उनकी जागरूकता अद्वितीय है। हान कांग अपनी काव्यात्मक और प्रयोगात्मक शैली के कारण एक नवप्रवर्तक बन गई हैं। उनकी प्रमुख किताबों में द वेजिटेरियन, द व्हाइट बुक, ह्यूमन एक्ट्स और ग्रीक लेसन्स शामिल हैं। स्वीडिश अकादमी की नोबेल समिति के स्थायी सचिव मैट्स माल्म ने स्टॉकहोम में पुरस्कार की घोषणा की। 53 वर्षीय हान ‘द वेजिटेरियन’ के लिए 2016 में अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार भी जीत चुकी हैं।

YOU MAY ALSO LIKE

भ्रष्टाचार के मामले में सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला…

गाली-गलौज वाली भाषा एससी-एसटी कानून के तहत अपराध नहीं

पहली एशियाई महिला और पहली दक्षिण कोरियाई लेखिका
हान कांग नोबेल साहित्य पुरस्कार जीतने वाली पहली एशियाई महिला और पहली दक्षिण कोरियाई लेखिका बनने के साथ दूसरी दक्षिण कोरियाई नागरिक भी बन गई हैं। इससे पहले दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति किम डे-जंग ने 2000 में शांति पुरस्कार जीता था। उन्हें देश के पिछले सैन्य शासन के दौरान दक्षिण कोरिया में लोकतंत्र बहाल करने और युद्ध- विभाजित प्रतिद्वंद्वी उत्तर कोरिया के साथ संबंधों को बेहतर बनाने के उनके प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया था।

पिता भी प्रतिष्ठित उपन्यासकार
1970 में दक्षिण कोरिया के ग्वांगजू शहर में जन्मीं हान कांग के पिता भी एक प्रतिष्ठित उपन्यासकार हैं। हान कांग ने खुद को लेखन के साथ-साथ कला और संगीत के लिए समर्पित किया।

japan
जापानी संगठन को परमाणु हथियारों के खिलाफ मुहिम के लिए पुरस्कार
शांति के लिए नोबेल पुस्कार से इस साल जापान के गैर लाभकारी संगठन निहोन हिंदांक्यो को सम्मानित किया गया है। संगठन को यह प्रतिष्ठित सम्मान दुनिया में परमाणु हथियारों के खिलाफ मुहिम चलाने के लिए दिया गया है। इस संगठन में वे लोग शामिल हैं, जो दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर हुए परमाणु हमले में जीवित बन गए थे। इन्हें हिबाकुशा कहा जाता है। ये हिबाकुशा दुनिया भर में अपनी पीड़ा और दर्दनाक यादों को निहोन हिंदांक्यो संगठन के जरिए साझा करते हैं।

1901 में हुई थी शुरुआत
शांति के लिए नोबेल पुरस्कार की शुरुआत 1901 में हुई थी। अब यह सम्मान 111 लागों और 31 संस्थाओं को प्रदान किया जा चुका है। महात्मा गांधी को शांति के लिए नोबेल पुरस्कार के लिए पांच बार नॉमिनेट किए जाने जाने के बाद भी प्रदान नहीं किया गय।

किसे मिला था शांति का पहला नोबेल
शांति के लिए पहला नोबेल पुरस्कार 1901 में फ्रांस के फ्रेडरिक पैसी और स्विटजरलैंड के जीन हेनरी डुनेंट को प्रदान किया गया था। यह सम्मान जीन हेनरी डुनेंट को घायल सैनिकों की मदद करने और मानवीय प्रयासों के लिए अंतरराष्ट्रीय समझ बनाने के लिए प्रदान किया गया था जबकि फ्रेडरिक पैसी को यह अंतर्राष्ट्रीय शांति सम्मेलनों, कूटनीति और मध्यस्थता के लिए जीवन पर्यंत प्रयासों के लिए प्रदान किया गया था। आपदा और युद्ध में मानवीय सहायता पहुंचाने वाले दुनिया के सबसे बड़े संगठन रेड क्रॉस की स्थापना का श्रेय जीन हेनरी डुनेंट को दिया जाता है। कहानी कुछ इस तरह है कि साल 1859 में उत्तरी इटली के सोलफेरिनो शहर में एक युद्ध चल रहा था। स्विस व्यापारी हेनरी डुनेंट ने हजारों इतालवी, फ्रांसीसी और ऑस्ट्रियाई सैनिकों को मारते-मारते देखा। इस दौरान उन्होंने घायल सैनिकों की मदद की। इसके बाद सोलफेरिनो की स्मृति में एक पुस्तक लिखी जिसमें एक ऐसे संगठन की योजना थी जो युद्ध के मैदान में बीमार और घायलों की मदद करे।

research
रिसर्च : लोगों की खुशहाली को कैसे प्रभावित करते हैं संस्थान
डैरोन एसमोग्लू, साइमन जॉनसन और जेम्स रॉबिन्सन को अर्थशास्त्र के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार मिला है। उन्हें यह पुरस्कार इस बात पर रिसर्च के लिए मिला है कि संस्थान कैसे बनते हैं और लोगों की खुशहाली को कैसे प्रभावित करते हैं। उनकी रिसर्च बताती है कि मजबूत और निष्पक्ष संस्थान जैसे-अच्छी सरकारें और कानून व्यवस्था लोगों की जिंदगी पर सकारात्मक असर डालते हैं।

नोबेल पुरस्कार समिति ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि संस्थाओं के गठन और परिवर्तन की परिस्थितियों को समझाने के लिए पुरस्कार विजेताओं का मॉडल तीन फैक्टरों पर आधारित है। पहला है संसाधनों के बंटवारे और समाज में निर्णय लेने की शक्ति (अभिजात वर्ग या जनता) को लेकर संघर्ष।

समिति ने आगे बताया, ‘दूसरा यह है कि जनता को कभी-कभी सत्ता का इस्तेमाल करने का अवसर मिलता है। वे संगठित होकर और शासक वर्ग को धमकी देकर ऐसा कर सकते हैं। इसलिए समाज में सत्ता केवल निर्णय लेने की शक्ति से कहीं अधिक है। तीसरा है प्रतिबद्धता की समस्या, जिसका मतलब है कि अभिजात वर्ग के पास जनता को निर्णय लेने की शक्ति सौंपने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।’

क्या है नोबेल पुरस्कार का इतिहास?

एसमोग्लू और जॉनसन मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में काम करते हैं और रॉबिन्सन शिकॉगो विश्वविद्यालय में अपना शोध करते हैं। अर्थशास्त्र पुरस्कार को पहले बैंक ऑफ स्वीडन पुरस्कार के रूप में जाना जाता था। आर्थिक विज्ञान का यह पुरस्कार अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति दिया जाता है। बैंक ऑफ स्वीडन ने 1968 में नोबेल की स्मृति में इसकी शुरुआत की थी। नोबेल 19वीं सदी के व्यवसायी और रसायनज्ञ थे, जिन्होंने डायनामाइट का आविष्कार किया था और पांच नोबेल पुरस्कारों की स्थापना की थी।
हालांकि, कुछ लोग इस बात पर जोर देते हैं कि अर्थशास्त्र का पुरस्कार तकनीकी रूप से नोबेल पुरस्कार नहीं है। लेकिन, इसे हमेशा 10 दिसंबर को अन्य पुरस्कारों के साथ प्रदान किया जाता है। इस दिन नोबेल की पुण्यतिथि है। पिछले सप्ताह चिकित्सा, भौतिकी, रसायन विज्ञान, साहित्य और शांति के लिए नोबेल पुरस्कारों की घोषणा की गई थी।

Previous Post

आदर्श आचार संहिता से चंद मिनट पहले दिवाली बोनस का एलान

Next Post

बदरीनाथ कपाट 17 नवंबर को होंगे बंद

Related Posts

suprem-court
Hindi Edition

भ्रष्टाचार के मामले में सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला…

January 24, 2026
law
Hindi Edition

गाली-गलौज वाली भाषा एससी-एसटी कानून के तहत अपराध नहीं

January 24, 2026
The Asia Manufacturing Index assesses...
Hindi Edition

एशिया मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स का आकलन…

January 24, 2026
PM Modi said on the coronation of the new president, I am a worker, Nitin is my boss.
Hindi Edition

भाजपा का ‘नवीन युग’

January 24, 2026
Will the era of factories start rapidly in the new India?
Hindi Edition

नए भारत में क्या फैक्टि्रयों का दौर तेजी से शुरू होगा?

January 24, 2026
sharemarket
Hindi Edition

बजट 2026 से निवेशकों को बड़ी उम्मीदें

January 24, 2026

Recent News

India showcases its military might at Kartavya Path

India showcases its military might at Kartavya Path

January 26, 2026
Operation Sindoor takes centre stage at Republic Day parade

Operation Sindoor takes centre stage at Republic Day parade

January 26, 2026
who

US exits WHO

January 26, 2026
Trilateral talks

Trilateral talks

January 26, 2026
Starmer

APPALLING

January 26, 2026
Cardinal concern

Cardinal concern

January 26, 2026
Nod for deep-sea MINING

Nod for deep-sea MINING

January 26, 2026
Call for justice

Call for justice

January 26, 2026
Scrapping H-1B visa lottery

New H-1B rule

January 26, 2026
Danish PM urges NATO presence in Arctic region

Danish PM urges NATO presence in Arctic region

January 26, 2026
Keir Starmer

Starmer appoints Chandra as special envoy to the US

January 26, 2026
UK drops foreign student targets

UK drops foreign student targets

January 26, 2026

Blitz Highlights

  • Special
  • Spotlight
  • Insight
  • Entertainment
  • Health
  • Sports

International Editions

  • US (New York)
  • UK (London)
  • Middle East (Dubai)
  • Tanzania (Africa)

Nation

  • East
  • West
  • South
  • North
  • Hindi Edition

E-paper

  • India
  • Hindi E-paper
  • Dubai E-Paper
  • USA E-Paper
  • UK-Epaper
  • Tanzania E-paper

Useful Links

  • About us
  • Contact
  • Team
  • Privacy Policy
  • Sitemap

©2024 Blitz India Media -Building A New Nation

    No Result
    View All Result
    • Blitz Highlights
      • Special
      • Spotlight
      • Insight
      • Education
      • Sports
      • Health
      • Entertainment
    • Opinion
    • Legal
    • Perspective
    • Nation
      • East
      • West
      • North
      • South
    • Business & Economy
    • World
    • Hindi Edition
    • International Editions
      • US (New York)
      • UK (London)
      • Middle East (Dubai)
      • Tanzania (Africa)
    • Download
    • Blitz India Business

    © 2025 Blitz India Media -BlitzIndia Building A New Nation

    Go to mobile version